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राज-काज
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
राज-काज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित भाजपा के नेताओं का दावा है कि उप चुनावों में वह सभी 28 सीटें जीत रहे हैं। पर कुछ कदमों से साफ है कि पार्टी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं, आशंकित है।
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कमल नाथ, इमरती देवी और शिवराज चौहान।राज-काज
कमलनाथ की फिर सत्ता में वापसी भले न हो लेकिन उप चुनावों में कांग्रेस का माहौल इतना खराब नहीं है। ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेता सहित 25 विधायकों के पार्टी छोड़ने के बावजूद कांग्रेस का हर प्रत्याशी भाजपा को कड़ी टक्कर देता दिखाई पड़ रहा है।
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दो साध्वियों बीच होगी जंगराज-काज
कमलनाथ जब से प्रदेश कांग्रेस के मुखिया बने तब से ही पार्टी बदलाव के रास्ते पर है। खासकर धर्म से जुड़े उन मुद्दों को लेकर जिन पर भाजपा अपना पेटेंट समझती है। कांग्रेस ने मलेहरा विधानसभा सीट से मानस प्रवचन करने वाली साध्वी रामसिया भारती को टिकट...
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Shivshekhar Shukla is also Principal Secretary, Water Resources in MP ||  Whispersinthecorridorsराज-काज
कोरोना महामारी के मौजूदा दौर में जब मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक से लेकर संक्रमित हर अफसर, नेता और वीआईपी चिरायु, बंसल एवं मेदांता की ओर दौड़ रहे हैं तब प्रदेश के एक अफसर दंपत्ति ने कोरोना पॉजीटिव आने के बाद हमीदिया अस्पताल में भर्ती होकर अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है।
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Govind Singh Rajput: मंत्री के दरबार में जनता हाजिर होराज-काज
राजनीति में कब जानी दोस्त, दुश्मन बन जाएं और जानी दुश्मन, दोस्त, कोई नहीं जानता। इसका उदाहरण देखना है तो बुंदेलखंड के सुरखी विधानसभा क्षेत्र में पहुंच जाइए। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए गोविंद सिंह राजपूत यहां से उप चुनाव लड़ रहे हैं।
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MP Politics : मंत्री बनने से वंचित रहे नेताओं की अग्निपरीक्षा , विधायकी छोड़ी और अब चुनाव जीतने की चुनौतीराज-काज
कोरोना महामारी बढ़ने के साथ ‘जान है तो जहान है’ का स्थान ‘जान जाना है जाए, अब जहान जरूरी है’, ने ले लिया है। दरअसल, प्रदेश की सत्ता से कांग्रेस को बेदखल करने के बाद राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ‘जान है तो जहान है’।
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BJP-Congressराज-काज
इसे कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेता को मिले फ्री हैंड का नतीजा माने या पार्टी की कार्यशैली में बदलाव की शुरुआत, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले प्रत्याशियों का एलान कांग्रेस का अप्रत्याशित और चौंकाने वाला निर्णय है। कांग्रेस के कार्य की यह शैली कभी नहीं रही।
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
former minister pradhuman singh tomar walked bare foot on road- मध्य प्रदेश  के पूर्व मंत्री बोले, ग्वालियर में पानी की दिक्कत खत्म होने तक नहीं पहनूंगा  चप्पल-जूताFood and Civil Supplies Minister Bisahulal Singh said - Food grains will be  made for 36 lakh 86 thousand laborers of the state | खाद्य एवं नागरिक  आपूर्ति मंत्री बिसाहूलाल सिंह नेराज-काज
इसे कहते हैं ‘सिर मुड़ाते ओले पड़े’। बागियों की मदद से सरकार बनाने के ‘साइड इफेक्ट’ भाजपा के सामने आने लगे हैं। चावल घोटाले में भाजपा सरकार फंस गई है। हालात ‘न निगलते, न उगलते’ वाले हैं। कार्रवाई के मसले पर सरकार असहाय है।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे नेता हैं जिन्हें आपदा में भी अवसर ढूंढ़ने में महारत हासिल है। प्रदेश इस समय दोहरे संकट में है। कोरोना महामारी से उबर नहीं पाया और बाढ़ की विभीषका ने दस्तक दे दी। कोरोना के प्रकरण कम नहीं हो रहे। ऐसे में युवाओं का ध्यान डायवर्ड करने लिए उन्होंने पहले...
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ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)राज-काज
महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के लिए ‘लकी’ हैं और ‘संकट’ का कारण भी। ‘लकी’ इस मायने में कि वे समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर आए तब भाजपा सरकार बना सकी। ‘संकट’ यह कि भाजपा ने विधानसभा का पूरा चुनाव ज्योतिरादित्य को टारगेट कर लड़ा था।
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Shivraj Singh Chouhanराज-काज
विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी छवि को लेकर खासे सतर्क हैं। जनता के बीच मेहनत करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन अच्छी ‘छवि’ का मैसेज न जाने से उन्हें विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा।
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Madhya Pradesh Cabinet Expansion Live: Tulsi Silawat और Govind Singh Rajput बने मंत्री, जानिए इनके बारे मेंराज-काज
राजनेताओं के जीवन में ‘कभी खुशी, कभी गम’ के दौर आते रहते हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में यह जल्दी-जल्दी आए। विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता बदली तो कमलनाथ के पाले में ‘खुशी’ और शिवराज के पास ‘गम’ ने दस्तक दी। 15 माह बाद ही समय ने करवट बदली।
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MP Politics Battle of supremacy in Madhya Pradesh BJP Digvijay ...राज-काज
हिंदू परंपराओं में मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान ‘विष्णु’ विश्राम करते हैं और प्रकृति की पूरी सत्ता ‘शिव’ के हाथों में आ जाती है। प्रदेश की सत्ता की बात करें तो शिवराज सिंह चौहान अर्थात ‘शिव’ को अपनी सरकार गठित करने के लिए जितने चक्कर दिल्ली और...
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
Kamal Nath tweet creates controversy, Shivraj Singh Chouhan ...राज-काज
आमतौर पर प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति दो-चार दिन के लिए हुआ करती थी। काम होता था निर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाना और स्पीकर, डिप्टी स्पीकर का चुनाव कराना। प्रोटेम स्पीकर का दायित्व किसी वरिष्ठ विधायक को सौंपा जाता था। बदली हुई परिस्थितियों में अपेक्षाकृत जूनियर विधायक रामेश्वर शर्मा प्रोटेम स्पीकर बन गए।
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Kamalnath The CM Of MP : Political Career Prediction For New Chief ...राज-काज
ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों के पार्टी छोड़ने और सत्ता गंवाने के साथ कमलनाथ के प्रबंधन पर सवाल उठने लगे थे। अब गलेहरा विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और नेपानगर की आदिवासी विधायक सावित्री देवी के इस्तीफे से कमलनाथ के कौशल पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया है। दोनों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर ली।
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Shivraj Singh Chauhan Update; Madhya Pradesh Chief Minister Says ...राज-काज
‘पार्टी विद डिफरेंस’ से ‘पार्टी विद डिफेंस’ हो जाने पर कितने संकट आते हैं, इसका सबसे बड़ा उदारहण है भाजपा। जब सब राजनीति को गंदा मान रहे थे, धारणा बनी कि राजनीति में कोई चाल, चरित्र नहीं होता। हर गलत काम जायज हो जाता है। ऐसी धारणा के बीच भाजपा ने खुद को ‘पार्टी विद डिफरेंस’ घोषित किया।
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जानिए कैसे मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की हताशा ने बढ़ाया भाजपा का हौसलाराज-काज
 à¤šà¥Œà¤¬à¥€à¤¸ विधानसभा सीटों के उप चुनाव में इस बार विकास एवं तरक्की के मुद्दे à¤—à¥Œà¤‚à¥œÞ à¤¹à¥‹à¤‚à¤—à¥‡à¥¤ इनकी जगह धोखा, गद्दारी एवं दगाबाजी एजेंडे के केंद्र में होंगे। अपनों की दगा से चोट खाई कांग्रेस इन्हें लेकर आगे बढ़ने वाली है। शुरुआत दिग्विजय सिंह एवं उनके बेटे जयवर्धन सिंह ने की थी...
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
राज-काज
राजनीति में कुछ नेता हमेशा ऐसे रहे हैं, जिन्हें ‘बिन पेंदी का लोटा’ की संज्ञा दी जाती है। इनकी न कोई विचारधारा होती, न ही कोई राजनीतिक चरित्र। जहां स्वार्थ पूरा होता दिखा, ‘बिन पेंदी के लोटे’ की तरह लुढ़क जाते हैं। मप्र में भी ऐसे नेताओं की कमी नहीं है। विधानसभा के 6 सदस्यों को इस श्रेणी में गिना जा सकता है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने इन्हें टिकट नहीं दिया तो विचारधारा ताक पर रखी और दूसरे दलों से या निर्दलीय तौर पर मैदान में उतर गए।
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
राज-काज
अच्छी खासी चलती सरकार कैसे बैकफुट पर आती है। साख पर कैसे बट्टा लगता है, कुछ निर्णय एवं बयान यह समझने के लिए पर्याप्त हैं। कम से कम शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते ऐसे निर्णयों, बयानों की उम्मीद नहीं थी। जैसे, शराब ठेकेदारों के सामने प्रदेश सरकार नहीं झुकी, उनकी मांगें नहीं मानी, सरकार को खुद शराब दुकानें चलाना पड़ीं, इसमें कोई बुराई नहीं।
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
राज-काजवरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आ चुके हैं। इसलिए उनके ट्वीटर हैंडल को लेकर खड़ा हुआ विवाद बेवजह नहीं कहा जा सकता, जैसा दिखाने की कोशिश सिंधिया की ओर से की जा रही है। ज्योतिरादित्य कांग्रेस में थे। न उनकी नेतृत्व सुन रहा था, न प्रदेश की सरकार उन्हें तवज्जो दे रही थी। प्रदेश के नेता उन्हें किनारे करने में सफल होते दिख रहे थे। इन कारणों से उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का मन बनाया।
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
प्रदेश सरकार के मंत्री कमल पटेल अपने बयानों के कारण चर्चा में हैं। उनके कई बेतुके बयानों का मजाक उड़ाया जा रहा है। जैसे, उन्होंने कह दिया, गेहूं खरीद घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जेल जाएंगे। कमल ने जो कहा, क्या यह संभव है? यह सवाल ही उन्हें मजाक का पात्र बना रहा है। प्रश्न यह है कि मंत्री बनने के बाद क्या उन्हें संभल कर नहीं बोलना चाहिए। इससे पहले उन्होंने कहा था, मैंने किसानों से अपील की है कि जिन्हें ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र मिले हैं...
दिनेश निगम ' त्यागी ' -
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो गुत्थी उलझी है उसे सुलझा पाना भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के बूते से बाहर दिख रहा है। इसी कारण बैठकों के दौर चल रहे हैं लेकिन मंत्रियों की सूची फाइनल नहीं हो पा रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल विस्तार की तीन तारीखों का संकेत दे चुके हैं। अब कहा जा रहा है, यह 31 मई से पहले हो जाएगा।
दिनेश निगम ' त्यागी ' -
- ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर गलत किया या सही, यह सवाल उनके भाजपा ज्वाइन करने के बाद से ही बहस का मुद्दा है। इसलिए भी क्योंकि कांग्रेस में हर प्रमुख निर्णय में उनसे बात की जाती थी। वे राहुल गांधी के सबसे नजदीक नेताओं में से एक थे। क्या भाजपा में आने के बाद उनका यह दबदबा बरकरार है। भाजपा नेताओं के कुछ बयानों के कारण नए सिरे से ऐसे सवाल उठे हैं।
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
- शिवराज सिंह चौहान 13 साल मुख्यमंत्री रहे। कई मुद्दों पर जब विपक्ष उन पर हमला करता तो वे कहते कि कुछ मुद्दों पर राजनीति नहीं की जाना चाहिए। अब वे खुद इसके शिकार हैं। दरअसल, विपक्ष में आने के बाद वे हर उस मुद्दे पर सरकार को घेरते हैं, जो उन्हें अपने कार्यकाल में पसंद नहीं आता था।, मुद्दा कितना भी संवेदनशील क्यों न हो। जैसे, छतरपुर की एक लड़की प्रज्ञा की थाइलैंड में मृत्यु हुई, कमलनाथ ने आनन-फानन निर्णय लेकर मदद का भरोसा दिलाया। मामला संवेदनशील था, पर मामा अर्थात शिवराज शांत नहीं रहे और इस पर भी राजनीति शुरू कर दी। उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर से बात की और प्रचार पाने बातचीत का वीडियो वायरल करा दिया। इसमें विदेश मंत्री सारी व्यवस्था कराने का भरोसा दिला रहे थे। मजेदार बात यह है कि शिवराज का वीडियो वायरल होने से पहले ही विदेश मंत्री का ट्वीट आ गया कि प्रज्ञा के परिजनों का पासपोर्ट बनवा कर सारी व्यवस्था की जा रही है। इस पर शिवराज सोशल मीडिया में खूब ट्रोल......
दिनेश निगम ‘त्यागी’ -
- प्रदेश के साथ देश भर में चर्चित हो चुके हनीट्रैप मामले में आगे और खुलासे हों या वे ठंडे बस्ते में डाल दिए जाएं, पर इसका असर कई स्तर पर दिखने लगा है। हनीट्रैप में नौकरशाहों के साथ सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा नेताओं के शामिल होने की रही। बिना नाम उजागर हुए कुछ ऐसे चेहरों से नकाब उतरे जो शालीन, शिष्ट और ‘लंगोट’ के मजबूत माने जाते थे। पार्टी के दो विधायकों के पाला बदलने के कारण भाजपा पहले से ही बैकफुट पर थी, हनीट्रैप का मामला उजागर होने के बाद बड़बोले भाजपा नेताओं की बोलती ही बंद हो गई। असर यह भी हुआ कि मुख्यमंत्री कमलनाथ में अपनी सरकार को लेकर आत्मविश्वास जाग गया। उन्होंने संभवत: पहली बार कहा कि प्रदेश की सरकार कांग्रेस एवं जनता के गठबंधन से चल रही है। यह पूरे पांच साल चलेगी और चुनाव के बाद फिर कांग्रेस की ही सरकार बनेगी। दूसरी तरफ हर रोज...
 à¤•à¥‹à¤µà¤¿à¤¡-19 महामारी को देखते हुए शारीरिक दूरी के नियमों के मद्देनजर आयोग ने कुछ फैसले लिए हैं। इसके तहत मतदान केंद्रों पर तैनात किए जाने वाले अधिकारियों की संख्या में बदलाव किया गया है।
राजनीतिक पारी खेलने को आतुर रिटायर्ड आइएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए।लखनऊ। प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीतिक पारी खेलने को आतुर रिटायर्ड आइएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा गुरुवार को भाजपा में शामिल हो गए। मकर संक्रांति के पर्व पर लखनऊ में भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा तथा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की मौजूदगी में एके शर्मा ने...
30 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाकर करेंगे अभियान की शुरुआत।नई दिल्ली। इस साल 17 जनवरी से शुरू होने वाला पोलियो टीकाकरण अभियान अब 31 जनवरी से चलाया जाएगा। भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 31 जनवरी 2021 को पोलियो टीकाकरण दिवस को पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 30 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में बच्चों को...
ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो भारत से मांगी मदद. नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस की दो वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) को इमर्जेंसी यूज़ की इजाजत मिलने के साथ ही दुनिया की निगाहें अब भारत पर टिक गई है. ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो (Jair Bolsonaro) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पत्र लिखकर भारत बायोटेक- एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की 20 लाख डोज तत्काल देने का ...
trumpदुनिया में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा फॉलो किए जाने वाले ट्रंप के टि्वटर खाते को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। ट्रंप का यह अकाउंट 4 मई, 2009 को बनाया गया था। जब ट्रंप ने इसका इस्तेमाल शुरू किया था तब वे सिर्फ न्यूयॉर्क के रियल एस्टेट बिजनेसमैन थे, लेकिन वक्त का...
epfoआपके पीएफ और घर आने वाली सैलरी में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। लेबर मिनिस्ट्री ने मंत्रालय की संसदीय समिति को कुछ ऐसा सुझाया है, जिसे मान लिए जाने पर नौकरीपेशा लोगों की टेक होम सैलरी बढ़ सकती है लेकिन पेंशन पाने वाले लोगों को नुकसान हो सकता है।
23-01-2021
 à¤¶à¤¿à¤µà¤°à¤¾à¤œ सरकार एक तरफ तो रोजगार उत्सव के जरिए बेरोजगारों को बुला रही है, 
27-01-2021
 à¤¯à¥Œà¤¨ हमले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के हाल ही के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने 19 जनवरी को अपने फैसले में कहा था 
30-01-2021
 à¤­à¤¾à¤°à¤¤ के खिलाफ चीन की एक नई चाल सामने आई है। पाक‍िस्‍तानी नौसेना के लिए चीन दूसरा नौसैनिक लड़ाकू जहाज तैयार कर रहा है। 
14-01-2021
साल 2017 की मकर संक्रांति के अवसर पर नीतीश कुमार को दही का टीका लगाते लालू यादव। फाइल तस्‍वीर।पटना। बिहार में दही-चूड़ा भोज के जरिए नए सियासी समीकरणों को गढ़ने की परंपरा 26 साल बाद टूट गई है। कोरोना संक्रमण के दौर में इस बार सियासी गलियारों में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन नहीं होगा। न ही राजनीतिक दलों के बीच गहमागहमी देखी जा सकेगी। राष्‍ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी तथा जनता दल...
30-01-2021
 à¤­à¤¾à¤°à¤¤ और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले दिनों जो टेस्ट सीरीज हुई थी उसका सबसे ज्यादा फायदा टीम इंडिया को ये हुआ
30-01-2021
 à¤¯à¤¦à¤¿ किसी व्‍यक्ति को कोई लक्ष्‍य हासिल करना है या फिर किसी सपने को पूरा करना है तो इसके लिए अच्‍छी सेहत सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण होती है।
विदिशा। प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही खींचातान पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुटकी लेते हुए कहा कि गुटबाजी के बीच मंत्रिमंडल का गठन तो हो गया।
रेलवे की भर्ती प्रक्रिया भी पटरी पर लौटी, 15 दिसंबर से होंगी परीक्षाएं; ढाई करोड़ परीक्षार्थी होंगे शामिलनई दिल्ली। भारतीय रेलवे में रुकी पड़ी भर्ती प्रक्रिया 15 दिसंबर से चालू हो जाएगी। इसके तहत अलग-अलग श्रेणी में कुल 1.42 लाख पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन होगा। इन परीक्षाओं में लगभग ढाई करोड़ परीक्षार्थी हिस्सा लेंगे। कंप्यूटर आधारित भर्ती परीक्षाओं की तैयारियां युद्ध स्तर पर चालू हो गई हैं।


दिनेश निगम ‘त्यागी’
Shivraj Singh Chouhanउप चुनाव
सात माह पहले सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उप चुनावों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना शुरू किए थे। कोरोना महामारी जब विकराल थी तब तो पूरा ध्यान इससे निबटने में था। मुख्यमंत्री खुद हर रोज समीक्षा कर व्यवस्थाएं देख रहे थे।
 à¤¹à¤° वीकेंड का वार में सलमान ख़ान आते हैं किसी को समझाते हैं तो किसी की फटकार लगाते हैं 
सही खानपान से अन्य रोगों के संक्रमण से भी बचे रह सकते हैं।शरीर स्वस्थ होगा तो हम न केवल कोरोना, बल्कि अन्य रोगों के संक्रमण से भी बचे रह सकते हैं। सही खानपान से यह आसानी से संभव है...
भोजन में विविधता: प्रतिदिन अपने खाने में विविधता लाएं अर्थात गेहूं के आटे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने के साथ ही मक्का, जौ, ज्वार, चना आदि के आटे का भी प्रयोग करें।
Pitru Paksha 2020: पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है पितृ-पक्ष, जानें- क्या है महत्व श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा से है, जो धर्म का आधार है। माता पार्वती और शिव को ‘श्रद्धा विश्वास रूपिणौ’ कहा गया है। पितृ-पक्ष हमें अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि मानव शरीर तीन स्तरों वाला है। ऊपर से दृश्यमान देह स्थूल शरीर है। इसके अंदर सूक्ष्म शरीर है, जिसमें पांच कर्मेंद्रियां, पांच ज्ञानेंद्रियां, पंच प्राण (प्राण, अपान, व्यान, उदान...


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