स्पेशल रिपोर्ट
देवदत्त दुबे -
भारतीय जनता पार्टी में संगठन सर्वोपरि है पार्टी ने यह संदेश देने में एक बार फिर बाजी मारी। अवसर कोई भी हो पार्टी संगठन से जुड़े नेता कार्यकर्ताओं को संगठन का महत्व बताने का मौका नहीं छोड़ते। दीनदयाल परिसर के उसी सभाग्रह में जिसमें 28 नवंबर 2005 की शाम के शिवराज सिंह को विधायक दल का नेता चुवा गया है। लगभग वही समय, उसी मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के दस वर्ष पूरे होने पर पार्टी द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सम्मान समारोह में संगठन से जुड़े नेताओं ने अपने उद्बोधन में पार्टी का महत्व और संगठन के संकल्पों की चर्चा की पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल ने अपने उद्बोधन में भाषण कम नारे ज्यादा लगवाये। जिसके माध्यम से उन्होंने मध्यप्रदेश का धन्यवाद कार्यकर्ता का आभार और शिवराज सिंह को शुभ कामनाएं दी। साथ ही पुरजोर तरीके से संकल्प दिलाया कि सबसे पहले राष्ट्र, फिर पार्टी और अंत में स्वयं की चिंता करनी चाहिए। 
झाबुआ लोकसभा के उपचुनाव के परिणाम के बाद दोनों दलों में इस समय उथल-पुथल मची हुई है। भाजपा हार के कारण तो खोजे जा रहे साथ किस के कारण हारे इसको पता करने ज्यादा रुचि दिखाई जा रही जबकि बमुश्किल मिली एक जीत को कांग्रेस नेता पचा नहीं पा रहे और जीत का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। प्रदेश में सत्ताधारी दल भाजपा में स्यापा की स्थिति है। प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा छाया है। असंतुष्ट खेमा जहां धीरे-धीरे मुखर हो रहा वहीं सत्ता से जुड़े अधिकांश नेता मौन साधे हुए है। जबकि आपस की चर्चा में पार्टी को मिली हार के कारण गिनाने से ज्यादा रुचि उन नेताओं के दोष ढूढ़े जा रहे हैं जो झाबुआ लोकसभा क्षेत्र में विभिन्न विधानसभा एवं सेक्टरों के प्रभारी थे किसी का मजाक यह कहकर उड़ाया जा रहा कि वे मैदान से ज्यादा सोशल मीडिया में सक्रिय रहे तो किसी को खाने-पीने में मशगूल होना बताया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि झाबुआ से लौटने के बाद कुछ नेता शारीरिक तो कुछ आर्थिक रूप से मजबूत दिखाई दिये जबकि संगठन से जुड़े पदाधिकारी गंभीर रूप से चिंतन मनन कर रहे हैं कि आखिरी इतनी करारी पराजय हुई कैसी.... 
देवदत्त दुबे -
राजनीति में कभी कुछ स्थाई नहीं होता निरंतर परिवर्तन राजनीति की अनिवार्यता है। खासकर जब-जब राजनीति में परिणाम अनुकूल न आये तब-तब परिस्थितियों को परिवर्तित करने की बात होने लगती है। यही कारण है कि उपचुनाव के परिणाम आने के बाद प्रदेश में राजनैतिक परिस्थितियों के परिवर्तन की बात होने लगी है। वैसे देखा जाये तो एक लोकसभा और एक विधानसभा के हार जाने या जीत जाने से प्रदेश की सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब पूरी सरकार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है तब दिशा और दशा..... 
देवदत्त दुबे -
यदि कोई छात्र वर्ष भर नियमित स्कूल जाने, ट्यूशन भी पढ़े, घर में भी पढ़ाई करे और इसके बाद परीक्षा के समय गैसिंग, नकल, कापी सुधरवाने के प्रयास, पास होने के लिए करे। कुछ एेसी ही स्थिति इस समय झाबुआ के उपचुनाव के बाद सरकार की है। पूरी सरकार इस बात से झनझना गई है जिसमें आगे-आगे पाठ पीछे सपाट हो रहा है। सोचो, अगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मंत्रिमंडल के एक दर्जन सदस्य लगभग इतने ही सांसद, लगभग 50 विधायक, संगठन के मुखिया और चुनिंदा नेता झाबुआ में डेरा डालकर दिन-रात मेहनत नहीं करते पैसा पानी की तरह नहीं बहाते तो आज क्या स्थिति होती। वैसे अभी परिणाम आये नहीं हैं और भाजपा को जीत की भी पूरी उम्मीद है लेकिन भाजपा संगठन और सरकार परिणाम से पहले झाबुआ को जीतने के लिए जो प्रयास करने पड़े उसके कारण परेशान है क्योंकि तमाम तरह के हथकंडे अपनाने और पूरी ताकत झोंकने के बाद न तो एक तरफा चुनावी माहौल बना पाये और न ही मतदान का प्रतिशत बढ़ा पाये बल्कि मतदान प्रतिशत कम और हो गया जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव के समय कोई बाहरी प्रयास नहीं हुए तब भी लोगों ने उत्साह से मतदान किया। 
देवदत्त दुबे -
“समस्या है तो समाधान है ही” शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में आज दो बड़ी समस्याओं प्रदूषण और नशे के खिलाफ भोपाल और इंदौर कार्यशाला आयोजित की गई जिनमें वक्ताओं ने इन समस्याओं के समाधान के रास्ते सुझाये। भोपाल में जहां ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन समाधान की ओर दो दिवसीय संगोष्ठी आज विधानसभा के मुख्य सभागार में शुरू हुई जिसमें मुख्यमंत्री वक्ता के रूप में आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने अपने उद्बोधन में लोगों को प्रक=ति का संरक्षण करने की सलाह देते हुए कहा कि मनुष्य द्वारा पंचमहाभूतों को ही प्रदूषित किए जाने के कारण इस तरह की समस्याएं पैदा हो रही है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का समाधान भारत की संस्क=ति एवं जीवन दर्शन में मौजूद है जिसे हम सिंहस्थ घोषणा पत्र के माध्यम से पूरी दुनिया के समक्ष ले जाने का प्रयास करेंगे..... 
देवदत्त दुबे -
वर्तमान में राजनैतिक परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी है कि प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों ने पिछले एक पखवाड़े में झाबुआ सीट को झपटने के लिये लगभग हर दांव खेला है। आज आखिरी दांव के रूप में घर-घर दस्तक दी जा रही है। क्षेत्र से बाहरी नेताओं की विदाई होने के बाद आखिरी मुकाबला भी अब स्थानीय नेताओं के बीच होना है। झाबुआ लोकसभा का चुनाव अब तक सबसे हाई प्रोफाईल चुनाव हो गया, जिसमें दोनों दलों के दिग्गज नेताओं ने जमकर चुनाव प्रचार किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले एक सप्ताह से दिन-रात झाबुआ डेरा डाले रहे दर्जनभर मंत्री, सांसद और विधायकों ने पूरे को भाजपामय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी इसके बावजूद भाजपा नेता जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है। यही कारण है कि आज स्थानीय कार्यकर्ता जहां घर-घर दस्तक दे रहे, वहीं रात्रि में मतदाताओं की खुशामदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी। उधर कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया भी अपनी जिंदगी का सबसे कठिन चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले तीन महीनों से तैयारी कर भूरिया को भाजपा संगठन और सत्ता से ऐसी चुनौती मिली है, जिसमें वे अंदर तक हिल गये। 
आज शाम को चुनाव प्रचार समाप्त होने के पूर्व तक राजनैतिक दलों ने मतदाताओं को प्रभावित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी, मतों से अपनी अपनी झोली भरने के लिए पिछले एक पखवाड़े में बोझिल झाबुआ को जमकर झकझोरा गया जिससे झाबुआ उपचुनाव की हलचल भोपाल से लेकर दिल्ली तक महसूस की जा रही है। आदिवासी बाहुल्य वाला झाबुआ लोकसभा क्षेत्र का अधिकांश भू-भाग छोटे-छोटे टोले-मजीरों में छितरा पड़ा है। अब तक नीरक्ष और बोझिल चुनाव देखते आ रहे इस क्षेत्र के लोग ग्लैमरस चुनाव प्रचार और खुशामदी से भौचक्के हैं। जहां कभी मंत्री नहीं गया वहां मुख्यमंत्री पहुंचे जहां विधायक नहीं गया वहीं मंत्री डेरा डाले हैं। लग्जरी गाडि़यों से महंगे लिबास पहने उतरते नेताों ने पूरे झाबुआ क्षेत्र को झकझोर दिया है। चप्पे-चप्पे पर नेताओं का जमघट आज मतदाताओं को प्रभावित करने की आखिरी कोशिश करेगा। बिहार विधानसभा के चुनाव एेसी परिस्थितियां बनी है कि हर दल झाबुआ की सीट को अपनी झोली में डालना चाह रहा है प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के अलावा जनता दर (यू) की महत्वाकांक्षा भी इसी कारण बढ़ी है। बहरहाल झाबुआ लोकसभा सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है। 
देवदत्त दुबे -
शुरुआती दौर में भाजपा के पक्ष में एक तरफा माने जाने वाला देवास विधानसभा के उपचुनाव का दंगल अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। दरबार के दबदबे को पहली बार दबी जुवान से कड़ी चुनौती मिल रही है। स्व़ महाराज तुकोजीराव पवार के निधन के बाद महल से लोगों का मोहभंग साफ देखा जा रहा है। स्व़ पवार का इस क्षेत्र में दबाव, प्रभाव और स्वभाव के सम्मिश्रण का एक ऐसा दबदबा था, जिसके चलते वे लगातार छः बार यहां से विधानसभा का चुनाव जीते उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ उनके प्रभाव की परिचायिक थी लेकिन उनके जाने के बाद महल से लोगों को वैसे प्यार और समभाव की उम्मीद नहीं बची है, जिसके कारण लोग दबी जुबान से अब देवास में कड़े मुकाबले की बातें कर रहे हैं। स्व़ पंवार के बेटे जहां एक हत्या के केस में फरार चल रहे हैं, वहीं महारानी गायत्री राजे घर-घर जाकर जनसंपर्क करने में असहज महसूस कर रही है। वे हाथ जोड़कर वोट मांगने की भी पक्षधर नहीं बताई जाती है। ऐसे चुनाव अभियान का पूरा दारोमदार भाजपा संगठन पर आ गया है, जो सहानुभूति लहर की उम्मीद भाजपा को थी वह भी नदारद है, वहीं...... 
देवदत्त दुबे -
अब जबकि झाबुआ लोकसभा के उपचुनाव में मतदान को केवल एक सप्ताह का समय शेष है तब भी चुनाव प्रचार में लगातार जूझ रहे नेता गांव-गांव, गली-गली में मतदाताओं को बूझ रहे हैं, लेकिन अब भी राजनैतिक समीक्षकों के लिये झाबुआ अबूझ पहली बना हुआ है। वैसे तो अधिकांश परिस्थितियां झाबुआ में बिहार जैसी ही बन गई है, बिहार में नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ सभायें ले रहे थे जबकि झाबुआ में मुख्यमंत्री, लेकिन विपक्ष के पास बिहार जैसा दमदार नेतृत्व (नीतेश और लालू) का अभाव है जिसके कारण शायद ही विपक्ष खासकर कांग्रेस इस अनुकूल परिस्थितियों का फायदा उठा पाये। प्रदेश में अन्य लोक सभा क्षेत्रों की बजाय झाबुआ लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के पास आदिवासियों के रूप में एक समृद्ध वोट बैंक है, जिसके कारण पिछले चुनाव को छोड़कर हमेशा कांग्रेस यहां चुनाव जीतती आई है। कांतिलाल भूरिया के रूप में कांग्रेस के पास दमदार प्रत्याशी भी है। कांग्रेस के पास पेटलावद विस्फोट, महंगाई, सूखा जैसे आक्रमक मुद्दे भी है तो बिहार चुनाव के बाद मोदी और भाजपा के प्रभाव में भी कमी आई है। 
देवदत्त दुबे -
झाबुआ-रतलाम लोकसभा क्षेत्र के उपचुनाव को सत्ताधारी दल में जीत के प्रति खटका है, जब-जब पार्टी यहां माहौल बनाती है तब-तब कोई न कोई झटका ऐसा लगता है जिससे सत्ता व संगठन को झाबुआ सीट झमेले में दिखाई देने लगती है। यहां कारण है कि पार्टी ने चुनाव प्रचार की न केवल रणनीति बदली है वरन चुनाव जिताऊ नेताअेां को मोर्चे पर तैनात किया है। दरअसल आदिवासी बाहुल्य वाली इस सीट पर कांग्रेस की हमेशा पकड़ मजबूत रही है। स्व़ दिलीप सिंह भूरिया के सहारे पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की, जब मोदी के ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ नारे से मतदाता प्रभावित था अब लोगों में अच्छे दिनों कि न आशा बची है और बिहार के चुनाव परिणाम के बाद मोदी की साख को भी गहरा धक्का लगा है। वैसे भी भाजपा की इस इलाके में सबसे बड़ी पूंजी संघ का विस्तृत नेटवर्क है जिसमें वनवासी कल्याण परिषद सेवा भारती और धर्म रक्षा समितियों के माध्यम से गांव-गांव में कही न कही आदिवासी संघ के इन अनुवांषिक संगठनों से जुुड़े हैं, लेकिन संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा आरक्षण के संबंध में दिये गये बयान के कांग्रेस इस इलाके में पर्चे बांट रही है, जिसके माध्यम से आदिवासियों को यह समझाया जा रहा है कि यदि भाजपा जीती तो आरक्षण समाप्त कर देगी।ऐसे भाजपा की सबसे ताकत संघ ही इससमय बचाव की मुद्रा में है और संघ से जुड़े लोग टोलियां बनाकर गांव-गांव आदिवासियों को समझा रहे हैं कि भाजपा आरक्षण को खत्म नहीं करेगी। 
भोपाल/ वैसे ही रतलाम लोकसभा उपचुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं थी ऊपर से बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं कांग्रेस बिहार की जीत को भुनाने में जुट गई है। मध्यप्रदेश में 21 नवंबर को होने जा रहे रतलाम लोकसभा और देवास विधानसभा को चुनाव सत्ताधारी दल भाजपा के लिए चुनौती बन गये हैं। हालांकि इन दोनों क्षेत्रों में पार्टी की तैयारी पिछले दो महीनों से चल रही थी लेकिन चुनाव होने के एक पखवाड़े पूर्व बिहार में मिली पार्टी को करारी हार ने प्रदेश के नेताओं के आत्मबल को हिला दिया है। पार्टी नेताओं में चुनावी उत्साह अब गायब है। अलबत्ता चुनाव प्रचार की गति जरूर बढ़ा दी है। 
देवदत्त दुबे -
रतलाम लोकसभा और देवास विधानसभा के उपचुनाव दोनों दलों के लिये प्रतिष्ठा का बन चुके हैं। ऐसे में ही दोनों दलों के असंतुष्टों को अहमियत मिलना शुरू हो गई है। संगठन एक-एक कार्यकर्ता की भूमिका तय कर रहा है। दरअसल रतलाम लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस अपनी-अपनी जीत की संभावनाएं देख रहे, भाजपा जहां सहानुभूति और मैनेजमेंट की दम पर जीत हासिल करना चाह रही है, वहीं कांग्रेस इस सीट को अपनी परंपरागत सीट मानती है साथ ही कांतिलाल भूरिया के रूप में वजनदार प्रत्याशी के कारण भी कांग्रेस को जीत की आशा है। राजनैतिक परिस्थितियां भी वर्तमान में ऐसी है, जिसमें दोनों ही दलों के लिये जीत महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश स्वयं चुनावी तैयारियांें का जायजा रतलाम-झाबुआ पहुंच कर ले रहे हैं। शुक्रवार को विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बैठकें की हैं, उनके साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान भी साथ में थे। 
देवदत्त दुबे -
पिछली बार जब प्रशासनिक फेरबदल हुए थे तब मीडिया में फेरबदल को लेकर जो छीछलेदार हुई थी वह वर्तमान परिस्थितियों को देखकर सही साबित हो रही है। सिफारिश के आधार पर मैदानी पोस्टिंग पा गये अधिकारी लगातार असफल सिद्ध हो रहे जबकि कर्मठ और योग्य अधिकारी वल्लभभवन और पीएचक्यू में बैठे हैं। प्रदेश में कभी सूखे के मूल्यांकन के लिये भोपाल से अधिकारी भेजे जा रहे हैं तो कभी उज्जैन सिंहस्थ कार्यों की गति देने के लिये तो कभी अधिकारियों को अल्प समय में ही भोपाल बुलाना पड़ रहा है। इसके बावजूद भी खरगोन, खंडवा, ग्वालियर के बाद उज्जैन में जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है। वहीं कहीं-कहीं कर्फ्यू् भी लगाना पड़ रहा है। पुलिस महानिदेशक की लगातार कोशिश्ाों के बाद भी अपराध बढ़ रहे हैं। 
देवदत्त दुबे -
21 नवंबर को प्रदेश में होने जा रहे रतलाम लोकसभा और देवास विधानसभा के चुनाव के लिए प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर अब चुनावी ब्यूह रचना बनाना शूरू कर दी है। दोनों ही दल अपने-अपने रणनीतिकारों के माध्यम से मुद्दों को धार दे रहे हैं। बहरहाल प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी इन चुनाव के लिए घोषित कर दिये हैं। कांग्रेस पार्टी ने भी शुक्रवार को अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं जबकि भाजपा पहले ही इन सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। रतलाम लोकसभा के उपचुनाव मंे कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता कांतिलाल भूरिया को चुनाव मैदान में उतारा है वहीं देवास विधानसभा के उपचुनाव के लिए जयप्रकाश शास्त्री को प्रत्याशी घोषित किया है। जब प्रकाश शास्त्री नया नाम है। शास्त्री देवास शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं और सज्जन सिंह वर्मा की सिफारिश पर शास्त्री को टिकिट दिया गया है। वैसे शास्त्री को कांग्रेस के सभी गुटों का समर्थन प्राप्त है लेकिन भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में सहानुभूति होने के कारण शास्त्री की राह आसान नहीं है। 
देवदत्त दुबे -
भोपाल/ वैसे तो इन 60 वर्षों में मध्यप्रदेश ने प्रगति अनेकों सौपान तय किये हैं, लेकिन मध्यप्रदेश को वो मुकाम नहीं मिल पाया जिसका वह हकदार है। इसके पीछे कभी राजनैतिक परिस्थितियां तो कभी प्राकृतिक आपदाएं जिम्मेदार है, जिसके कारण प्रदेश विकास एक सरल रेखा में नहीं हुआ जो ऊपर की जाती है। हमेशा उतार-चढ़ाव लगे रहने के कारण प्रदेश के विकास को हमेशा वक्र रेखा से ही गुजरना पड़ा। आज प्रदेश का 60 स्थापना दिवस मनाते समय हमें अवश्य चिंतन मनन आत्महत्या का है, क्यों जमीन के ऊपर बेरोजगारी और गरीबी, क्यों बूंद-बूंद पानी के लिये हम तरस रहे और क्यों आज प्रदेश के नौजवान आईएएस और आईपीएस नहीं बन पा रहे, जबकि जमीन के अंदर विपुल संपदा है। मप्र की धरती पर विश्व विख्यात हीरा-पन्ना है, लौह खनिज है। अयस्क है काला पत्थर है। जीवनदायिनी मां नर्मदा का सतत प्रवाह है विशाल वन समूह है। आखिर सब कुछ होते हैं। हम क्यों असहाय और दरिद्र हैं। 
देवदत्त दुबे -
एक बड़े आंदोलन का सपना संजोये त्रिस्तरीय पंचायती राज के प्रतिनिधि आंदोलन के फ्लाप होने के बाद सत्ता और संगठन में फूट डालने जुट गए हैं, जिससे आंदोलन अब मूल उद्देश्य से भटककर बयानबाजी का जरिया बन गया है। दरअसल पिछले कुछ महिनों से त्रिस्तरीय पंचायती राज के प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर प्रदेश में एक बड़े आंदोलन को करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन भाजपा संगठन और प्रदेश सरकार ने बीच -बीच में आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करके अधिकांश वे मांगे मान ली, जिसमें अधिकांश पंचायत प्रतिनिधि आते थे, जिससे आंदोलनकारियों के बीच से भाजपा समर्थित प्रतिनिधि अलग हो गये और आंदोलनकारियों की धार मोथरी हो गई रही-सही कसर प्रशासन ने आंदोलन के दिन टेंट उखाड़कर और गिरफ्तार करके कर दी। लगभग दो लाख प्रदर्शनकारियों की घोषणा करने वाले आंदाोलनकारियों को करारा झटका उस समय लगा जब बमुश्किल से डेढ़ हजार गिरफ्तारी ही भोपाल में हो सकी और तब ये माना गया कि सत्ता और संगठन ने बड़ी चतुराई से आंदोलनकारियों में फूट डालकर आंदोलन की हवा निकाली दी। लेकिन अब आंदोलनकारी भी इसी तर्ज पर भाजपा में फूट डालने में जुट गये हैं। 
देवदत्त दुबे -
इंदौर में सोमवार को संपन्न हुआ तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय धर्म-धाम सम्मेलन से जो निष्कर्ष निकले हैं, यदि उनका अनुशरण समाज में आधा प्रतिशत लोग ही करने लगे तो दुनिया में धर्म की ध्वजा विनाशक के रूप में नहीं अपितु मानव कल्याण के रूप में लहरायेगी। दरअसल इस समय दुनिया में धर्म के नाम अतिरेक की भाषा बोली जा रही है, जिससे आये दिन उन्माद की स्थिति बनती है। धािर्मक उन्माद के चलते-चलते धीरे-धीरे समाज में जातीय उन्माद भी फैलने लगा है। ऐसे संकट के समय में इंदौर में लगभग 280 विद्वानों ने जिनमें करीब 150 विदेशी विद्वान भी थे न केवल 300 शोधपत्र शामिल किये वरन गंभीर चिंतन मनन के उपरांत सभी धर्मों के ऐसे उभयनिष्ठ सूत्र निकाले जिनके माध्यम से समाज में समरसता, बंधुत्व, सहिष्णुता समन्वय और सौमनस्य की भाषा प्रभावी हो, 1893 में हुए शिकागो सम्मेलन की भांति भारत भूमि के मध्यप्रदेश से धर्म सम्मेलन के माध्यम से पूरी दुनिया को गंभीर और संतुलित धर्मवाणी निकालने का संदेश दिया गया है, जिससे धर्म शक्ति का उपयोग विश्व मानव कल्याण के लिये हो। 
देवदत्त दुबे -
पिछले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी स्पष्ट रूप नीति बनाई थी कि परिजनों को टिकिट नहीं दिये जायेंगे, इस नीति के चलते कुछ सीटों पर योग्य प्रत्याशी टिकिट से वंचित भी हो गये थे लेकिन मध्यप्रदेश में 21 नंवबर को होने जा रहे उपचुनाव में पार्टी ने मोदी नीति को ठेंगा बताते हुए दोनों सीटों पर परिजनों को ही टिकिट दिये हैं। मध्यप्रदेश में 21 नवंबर को होने जा रहे रतलाम-झाबुआ लोकसभा और देवास विधानसभा के उपचुनाव के लिये भाजपा प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में दोनों सीटों पर परिजनों के नाम दिल्ली हाईकमान को भेज दिये हैं। रतलाम लोकसभा सीट पर जहां भूरिया (विधायक ) को प्रत्याशी बनाया जा रहा है वहीं देवास विधानसभा के लिये स्व़ तुकोजीराव पवार की पत्नी गायत्री राजे को प्रत्याशी बनाया जायेगा। हालांकि दोनों ही सीटों पर पार्टी के पास इनसे बेहतर प्रत्याशी भी नहीं थे। 
अभी जब देश में जाति और धर्म पर न केवल बहस चल रही है वरन इनसे उत्पन्न परिस्थितियों के कारण समाज में विघटन हो रहा है अपराध बढ़ रहे हैं। यदि इंदौर के धर्म सम्मेलन से मानव धर्म की स्वीकृति बन जाये तो तभी यह धर्म सम्मेलन सफल कहा जा सकेगा। वास्तव धर्म ही है जो समाज को जोड़ता है, क्योंकि धर्म पर चलने वाला व्यक्ति कभी गलत न सोच सकता और न ही कर सकता है। सभी धर्मों का निष्कर्ष भी प्रायः यही है कि सत्य बोलो, प्रेम से रहो, करुणा, दया का भाव रखो यदि ये भाव प्रत्येक नागरिक में आ जाये तो फिर क्या फर्क पड़ता है कि वह किस धर्म से है लेकिन हम सब धर्म को मानते हैं धर्म की नहीं मानते। इसी कारण समाज में असंतोष, ईर्ष्या, घृणा, राग द्वेष, लोभ-लालच, अहंकार मोह ने अपना कब्जा कर लिया है, जिसके कारण अशांति का वातावरण है, मानसिक विकृतियां बढ़ रही है जिससे आत्महत्या करने की भी संख्या बढ़ी है। 
देवदत्त दुबे -
मध्यप्रदेश में जो भी राजनैतिक परिस्थितियां बन रही है वो प्रतिकूलता के प्रतिकार का परिणाम है, जिसके कारण स्वाभाविक राजनीति धीरे-धीरे जहां पीछे हो रही है, वहीं नैसर्गिक नेतृत्व, अहम मुद्दों की तो जैसी कोई बख्त ही नहीं है।  प्रतिकूलता का माहौल जहां राजनैतिक कारणों से भी है वहीं प्राकृतिक कारणों से भी जहां तक बात सरकार और भाजपा संगठन की बात करे तो अनेक प्रकार की प्रतिकूलतायें सामने हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौति इस समय सूखे के संकट से जूझ रहे किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं को न केवल रोकने कि बल्कि कैसे नुकसान का निर्धारण हो और कैसे मुआवजा राशि का वितरण समय पर हो जाये। 
देवदत्त दुबे -
भाजपा के लिये बिहार विधानसभा के चुनाव बेहद अहम है यही कारण है कि मध्यप्रदेश से कार्यकर्ताआें की लगातार मांग बढ़ रही है। प्रदेश कार्यालय से दिन भर कार्यकर्ताओं के लिये फोन लगाये जा रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की मांग अब तक पार्टी पूरी नहीं कर पाई जबकि दो चरण का मतदान संपन्न हो चुकी कार्यकर्ताओं की बेरुखी से संगठन भी परेशान है। इसके पहले तक भाजपा कार्यालय में चुनाव प्रचार में जाने के लिए होड़ लगी रहती थी यहां तक कि कार्यालय से मना करना पड़ता था कि अब मत जाईये जरूरत से ज्यादा कार्यकर्ता चुनाव क्षेत्र में पहुंच गये हैं लेकिन आज आलम यह है कि प्रदेश कार्यालय से फोन लगाते हुए नेताओं को यह कहना पड़ रहा है कि आप लोग पार्टी के काम नहीं आयेंगे तो पार्टी कैसे आपके बारे में सोचेगी तो कभी उदाहरण दिया जा रहा है कि नवरात्रि के समय अज्ञातवास में ध्यान करने वाले कैलाश विजयवर्गीय बिहार में काम कर रहे हैं। नवरात्रि में मौन व्रत रखने वाले प्रहलाद पटेल बिहार में दिनभर बैठकें ले रहे हैं यहां कि छिंदवाड़ा जिला अध्यक्ष से तो यहां तक कहना पड़ा कि यदि आपके जिले से 10 कार्यकर्ता भी बिहार नहीं जा पा रहे हैं जल्दी कीजिये शीघ्र ही कायकर्ताओं को बिहार भेजे। 
देवदत्त दुबे -
वर्तमान दौर में जब सूखे से फसले बर्बाद होने के कारण निराश और हताश किसान आत्महत्या कर रहे तब गढ़ाकोटा में महिलाओं ने सामूहिक रूप से हिम्मत दिखाई है कि गृहस्थी चलाने के लिये खेती के अलावा हम वैकल्पिक रोजगार चलायेंगे। मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा सागर जिले के गढ़ाकोटा नगर में आयोजित स्वसहायता समूह के सम्मेलन सह- प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 18 हजार महिलाएं एक सी वेशभूषा पहनकर आई महिलाओं ने सामूहिक रूप से वैकल्पिक रोजगार करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पं़ गोपाल भार्गव ने कहा कि फसलें खराब होने अथवा सूखे के कारण लाेगों को निराश होने की बजाय वैकल्पिक रोजगार की तरफ ध्यान देना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे पुरुषों के कंधा से कंधा मिलाकर रोजगार करें। 
देवदत्त दुबे -
लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस में निराशा हताशा का वातावरण बना था। अपर कार्यकारणी संगठन से उपजे विवाद के कारण कांग्रेस की लगातार किरकिरी हो रही थी, लेकिन नवरात्रि शक्ति पर्व शुरू होते ही कांग्रेस ने मजबूत होने की करवट ली है। प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव जहां ‘जन विश्वास पदयात्रा’ शुरू कर रहे हैं, वहीं दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है। गुरुवार को कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जमावड़ा करके जो शक्ति प्रदर्शन किया है एवं भविष्य के लिये संकल्प लिये हैं उससे कांग्रेस के अब मैदान में कमर कसकर आने के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अरुण यादव करीब डेढ़ वर्ष बाद अपनी कार्यकारणी का गठन कर पाये कार्यकारणी को लेकर पिछले एक डेढ़ माह से आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा था। इसी कारण नवगठित कार्यकारणी की पहली बैठक के लिये यादव अपने समर्थकों का भारी जमावड़ा कांग्रेस कार्यालय पर किया चूंकि आज ही दिग्विजय सिंह पुलिस को बयान देने आये थे इस कारण प्रदेश भर से दिग्विजय सिंह के समर्थक भी भोपाल आ गये जिससे कांग्रेस की बैठक एक शक्ति प्रदर्शन के रूप में बदल गई..... 
देवदत्त दुबे -
त्रिस्तरीय पंचायती राज के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सत्ता व संगठन से बड़ी चतुराई से जरूरत के अनुसार रुपये और रुतबे का समन्वय बनाकर आखिर दिनभर की गिचर पंचायत के बाद सहमति की गिचर पंचायत के बाद सहमति बना ही ली। वैसे तो अधिकांश व्यक्तियों का ही जीवन-सूत्र रुपया और रुतबा ही है ऐसे में पंचायत प्रतिनिधि भी इनके बगैर कैसे रह सकते हैं सो लगातार आंदोलन की तैयारियां चर्चाएं चल रही है इसी क्रम में आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव एवं भाजपा नेता अरविंद भदौरिया ने महत्वपूर्ण बैठक की। चूंकि चौहान और भार्गव ने बैठक की शुरुआत में ही कह दिया था कि यह एक परिवार की बैठक है। जिसमें खुलकर बोले एवं देशकाल परिस्थितियों पर विचार करते हुए वे ही मांगे सामने रखे जो पूरी की जा सके। 
देवदत्त दुबे -
वो समय गया जब राजनैतिक सीधे सादे, ईमानदार, सहज, सरल लोगों को आगे बढ़ाते थे, अब तो ‘गेम चेंजरों’ का रुतबा दलों में बढ़ रहा है। साम, दाम, दंड, भेद कैसे भी चुनाव जीतने और जिताने की क्षमता रखता हो तो पार्टी उसकी न केवल छोटी-मोटी गलतियों को माफ कर देती है वरन चुनावी मोर्चे पर उसे आगे रखती है। कभी ‘पार्टी विरुद्ध डिफरेन्श’ कहने वाली भाजपा में इस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह सबसे बड़े ‘गेम चेंजर’ माने जा रहे हैं। इसी पैटर्न पर अब पार्टी नीचे स्तर पर भी गेम चेंजरों की पूछ परख बढ़ रही है। भाजपा और संघ का सबसे बड़ा लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का है इसके लिये वह न केवल व्यक्ति बल्कि मुद्दों के लिहाज से भी वह आक्रामक हो रही है और विपक्ष रहते हुए जहां राम मंदिर और धारा 370 के बहाने हिन्दुत्व के मुद्दे को उभारा था, लेकिन अब इन मुद्दों पर लोगों का आकर्षण नहीं रहा क्योंकि..... 
कनाडा में एक तरफ जहां भारत, अमेरिका समेत 20 देशों के प्रतिनिधि कोरिया संकट के समाधान के लिए माथापच्ची कर रहे हैं, वहीं नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर शांति की कोशिशों को झटका देने की कोशिश की है। मंगलवार को नॉर्थ कोरिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उस ट्वीट संदेश पर आपत्तिजनक टिप्पणी की......
नई दिल्लीः इन दिनों भारतीय जनता पार्टी पर साउथ के मशहूर अभिनेता प्रकाश राज के शीत युद्ध जारी है। इसी का ताजा उदाहरण कर्नाटक में भी देखने को मिला। एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे अभिनेता के जाने के बाद भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गौमूत्र से मंच को धोया।
बेंगलुरुः कर्नाटक में चुनावी रंग परवान चढ़ने लगा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। योगी आदित्यनाथ की खिंचाई के बाद सीएम सिद्धारमैया ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। सिद्धारमैया ने कांग्रेस को पांडवों की तरह और भाजपा को कौरव बताया है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एक घर में अपने ही 13 बच्चों को बंधक बनाकर रखने वाले एक दंपति को गिरफ्तार किया गया है. 57 वर्षीय डेविड एलेन तुरपिन और 49 वर्षीय लुइस अन्ना तुरपिन के सभी 13 बच्चे कुपोषित हालत में मिले. उनकी आयु दो से लेकर 29 वर्ष तक है. पुलिस के मुताबिक, बच्चों को जब मुक्त कराया गया, उस समय कुछ बच्चे अंधेरे में पलंग से बंधे थे.
जालंधरः जापान की वाहन निर्माता कम्पनी Isuzu ने भारत में अपनी Isuzu D-Max  की V-Cross कार को लांच कर दिया है। कीमत की बात करें तो इसकी High ट्रिम की एक्स-शोरूम कीमत 15.76 लाख रुपए और Standard ट्रिम की एक्स-शोरूम कीमत 14.26 लाख रुपए रखी गई है। वहीं, इस कार को एक नए कलर ऑप्शन रूबी रेड में लांच किया गया है।
मुंबईः कमला मिल हादसे में पुलिस ने एक और गिरफ्तारी हुई है। मोजोस बिस्ट्रो पब के मालिक युग तुली ने मंगलवार को मुंबई पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पिछले 29 दिसंबर को हुई इस घटना में 14 लोग मारे गए थे। आत्मसमर्पण करने के बाद तुली को गिरफ्तार कर लिया गया।
14-01-2018
भोपाल। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने खाद्य महकमे के 143 कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों की भर्ती में पेंच लगा दिया है। विभाग अभी तक इन पदों पर डिप्लोमाधारकों को भी आवेदन करने का मौका देता आया है। लेकिन इस बार प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड ने विभाग के प्रस्ताव को यह कहते हुए लौटा दिया कि इस पद के लिए डिग्री अनिवार्य है इसलिए डिप्लोमाधारकों को इसके लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।
16-01-2018
भोपाल : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने सुरक्षाकर्मी को कथित रूप से थप्पड़ मार कर धक्का देने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना रविवार की है। शिवराज नगर पालिका चुनाव में प्रचार के लिए सरदारपुरा गए हुए थे। उन्होंने वहां रोड शो भी किया था।
दिनेश निगम ‘त्यागी’
-सच क्या है यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ही जाने, पर गुजरात में भाजपा की नई सरकार के शपथ ग्रहण शुरू होने से पहले ही वापस लौटने की वजह से शिवराज सिंह को लेकर शुरू हुआ अटकलों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे शिवराज से भाजपा नेतृत्व की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि उनकी कुर्सी खतरे में है। ऐसी ही अटकलें अमित शाह के उज्जैन दौरे के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान को लेकर चल पड़ी हैं। हालांकि इनका कोई ठोस आधार नहीं है। मुख्यमंत्री तो गुजरात से वापस लौटने के बाद मीडिया के सवाल के जवाब में और ट्वीट के जरिए स्पष्टीकरण देते हुए कह चुके हैं कि उनका पहले से कार्यक्रम निर्धारित था इसलिए वे मुख्यमंत्री....
16-01-2018
बोगोटा। सेंट्रल कोलंबिया में एक निर्माणाधीन ब्रिज गिरने की वजह से दस लोगों की मौत हो गई। वहीं इस हादसे में कई मजदूर अभी भी लापता हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस घटना में 2 लोग लापता हैं, जबकि 4 घायल हो गए हैं। चिराजारा में बन रहा ये ब्रिज, मेटा प्रांत में आता है और ये उस हाईवे का हिस्सा है, जो राजधानी बोगोटा को विलाविसेनसियो से जोड़ता है और अभी इसे आवाजाही के लिए नहीं खोला गया है।
16-01-2018
ganpat vasava 16 01 2018अहमदाबाद। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गणपतसिंह वसावा की कार पर हमला करने का मामला सामने आया है। एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे मंत्री की कार पर कुछ अनजान लोगों ने पथराव कर दिया, जिसके कारण मंत्री जी को कार्यक्रम से मजबूरन वापस लौटना पड़ा। यह घटना रविवार की है।
16-01-2018
मुंबई। चोट की वजह से नियमित विकेटकीपर रिद्धिमान साहा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले तीसरे टेस्ट से बाहर हो गए। उनकी जगह दिनेश कार्तिक को भारतीय टीम में शामिल किया गया है और वे 24 जनवरी से होने वाले तीसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम के साथ जुड़ेंगे। साहा हैमस्ट्रिंग की चोट से जूझ रहे हैं और इसी के चलते वे अंतिम समय में दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर हुए थे।
16-01-2018
patanjali 16 01 2018नई दिल्ली। पहले ही एफएमसीजी सेक्टर में काफी उथल-पुथल मचा चुकी पतंजलि आयुर्वेद अब ई-कॉमर्स के जरिये धमाका करने जा रही है। पतंजलि आयुर्वेद ने मंगलवार को एक साथ ई-कॉमर्स क्षेत्र की आठ बड़ी कंपनियों के जरिये अपने उत्पादों की बिक्री शुरू करने का एलान किया है। इसका मतलब हुआ कि.....
कैबिनेट: सातवें वेतनमान पर बैठक में नहीं हुई चर्चा, मेधावी छात्रों की फीस देगी सरकारभोपाल। सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई। हालांकि, सातवें वेतनमान का मुद्दा स्थगित कर दिया गया। कयास लगाई जा रही थी कि प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारियों को 1 जुलाई 2017 से ...
भोपाल/ प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को विधानसभा में घोषणा की कि लोगों के करोड़ों रुपए ठग कर भागने वाली कंपनियों की मानीटरिंग एवं समय पर कार्रवाई करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय में एडीजी के नेतृत्व में एक मानीटरिंग सेल का गठन किया जाएगा। इसके साथ रिजर्व बैंक आफ इंडिया को पत्र लिखकर आग्रह किया जाएगा कि वे कंपनियों को लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस का सत्यापन अनिवार्य करें। गृह मंत्री विधानसभा में भाजपा के यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण एवं सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं का जवाब दे रहे थे।


बाहुबली 2बाहुबली जब से रिलीज हुई है तब से फिल्मी दुनिया पर छाई हुई है. भारत में सफलता पाने वाली बाहुबली 2 विदेश को विदेशों में भी काफी सराहा जा रहा है. खबर है कि बाहुबली 2 मोस्को के अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में ओपनिंग फिल्म के तौर पर दिखाई जाएगी.
सर्दियों मेें धूप हर किसी को ही अच्छी लगती है लेकिन आजकल लोग या तो टैनिंग की वजह से या फिर अपने काम काज के कारण धूप नहीं ले पाते लेकिन यदि आप इसके फायदों के बारे में जानेगें तो आपको पता चलेगा कि धूप लेने से कितनी ही बीमारियां ठीक होती है।
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25 सितंबर
उपांग ललिता पंचमी व्रत। ललिता पंचमी। सोमवती पंचमी पर्व। बुध अस्त पूर्व में 16/22 पर।
26 सितंबर
बुध कन्या राशि में 10/28 पर। शुक्र पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में 26/20 पर।
27 सितंबर
मूल नक्षत्र में सरस्वती देवी का आवाह्न। भद्रकाली अवतार। अन्नपूर्णा परिक्रमा प्रारम्भ 19/09 बजे से। ओली प्रारम्भ (जैन) चतुर्थी पक्ष। सूर्य हस्त नक्षत्र में 05/56 पर। सूर्य-सूर्य, स्त्री-नपुंसक योग, वाहन मूषक, वायु नाड़ी, तदीश सूर्य (पुरुष), अत: बहुत हवा चले अनावृष्टि हो।
28 सितंबर
दुर्गाष्टमी व्रत। महाष्टमी। अष्टमी का हवनादि आज ही करें। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सरस्वती देवी का पूजन। अन्नपूर्णा परिक्रमा समाप्त 21/37 बजे। ओली प्रारम्भ (जैन पंचमी पक्ष)। श्री अष्टभुजी दुर्गा शक्ति पीठ (दुर्गा मंदिर) कानपुर में शतचण्डी यज्ञ का हवन पूर्णाहुति एवं महाप्रसाद वितरण। शक्ति संगीत सभा।
29 सितंबर......


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