स्पेशल रिपोर्ट
देवदत्त दुबे -
केन्द्र सरकार का एक अधिनियम मध्यप्रदेश में बीड़ी उद्योग को संकट पैदा करने वाला है। एक अप्रैल से लागू होने वाले एकट के चलते उद्योगपतियों ने जहां इस धंधे केा बंद करने का निर्णय लिया है । तो इस एक्ट के विरोध में मजदूर भी लाम बंद हो गए है। प्रदेश के बीड़ी मजदूर बाहुल्य बुंदेलखण्ड अंचल के संभागीय मुख्यालय सागर पर हजाों की संख्या में मजदूर और सट्टेदार नेता इकठ्ठा हुए। एक धरना सभाकर एक्ट के खिलाफ नाराजगी जताई। केन्द्र सरकार कोटपा कानून के तहत बीड़ी के बंडल पर स्वास्थ्य सम्बन्धी चेतावनी 40 फीसदी से बढ़ाकर 85 करना होगी। ऐसे एक अप्रैल से लागू किया जा रहा है। इसका देशभर में विरोध हो रहा है। मध्यप्रदेश में सर्वाधिक बीड़ी सागर, दमोह के बाद जबलपुर और सतना में बनती है। प्रदेश में सोलह लाख बीड़ी मजदूर और पांच लाख तेंदूपत्ता तोड़ने वाले मजदूर हंै। .... 
देवदत्त दुबे -
बसंत पंचती मतलब प्रेम, आपसी सौहाद्र, खुशहाली, हरियाली, उमंग, उल्लास का दिन, लेकिन धार में बसंत पंचमी आते ही बखेड़ा खड़ा हो जाता है यहां बसंत पंचमी मतलब तनाव, वैमनस्यता, ईष्या, क्रोध अहम का दिन हो जाता है वो भी ऐसे स्थान को लेकर जहां दोनों समुदाय की आस्था के केंद्र हो। वैसे तो तमाम धर्मगुरु, धर्मग्रंथ प्रेम का मार्ग बताते हैं, सब कहते हैं ईश्वर एक है नाम अलग-अलग, ईश्वर कण-कण में विद्यमान है उसे कही से भेजकर प्राप्त किया जा सकता है फिर पूजा और नमाज को लेकर धार की भोजशाला में हर बार यह बखेड़ा करना समझ से परे है या फिर धर्मग्रंथों और धर्मगुरुओं की बातें गलत है। बहरहाल, धार स्थित भोजशाला एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि 12 फरवरी को शुक्रवार है जिस कारण हिन्दुओं को पूजा करने एवं मुसलमानों को नमाज अदा करने के पीछे सामंजस्य का अभाव है। हालांकि शासन -प्रशासन पिछले एक पखवाड़े से यही प्रयास कर रहा है। बसंत पंचमी का त्यौहार शांति से निपट जाये, हिन्दु पूजा भी कर ले और मुसलमान नमाज भी अदा करले इसके लिये लगभग सात हजार पुलिस कर्मियों की धार में तैनाती की गई है।.... 
देवदत्त दुबे -
केंद्र सरकार की तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार ने भी महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव देने की घोषणा की तदनानुसार प्रदेश में हजारों महिला शिक्षकों ने ये अवकाश स्वीकृत भी करा लिया, लेकिन 29 दिसंबर मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग के आदेश के परिपालन में अचानक ही तत्काल प्रभाव से महिला शिक्षकों के स्वीकृत अवकाश निरस्त कर उन्हें संबंधित स्कूलों में ज्वाइन करने का फरमान जारी कर दिया गया साथ ही ऐसा न करने पर शिक्षक के वेतन आहरण न करने की धमकी भी दी गई है। दरअसल, केंद्र सरकार 2008 से शासकीय महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव अवकाश दे रही है। इसमें ये प्रावधान है कि उन महिला कर्मचारियों को 730 दिन का अवकाश स्वीकृत किया जाएगा जिनके बच्चे 18वर्ष से कम उम्र के हैं, जिससे संतान पालन में पर्याप्त समय दे सके। इस योजना से महिला कर्मचारियों को काफी राहत मिली थी। यही कारण है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस योजना को प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिये और 30-9-2015 को महिला लोक सेवकों को संतान पालन अवकाश के बारे में मंत्रालय से आदेश भी जारी हो गये, जिसमें यह भी स्पष्ट किया गया था कि लोक शिक्षण संचालनालय मप्र भोपाल के पत्र क्रमांक 2010-291 दिनांक 17़ 5़ 2010 में स्पष्ट किया गया है कि अध्यापक संवर्ग को स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत नियमित शिक्षकों के समान अवकाश का लाभ देय होगा,.... 
देवदत्त दुबे -
कृषि केबिनेट के बाद मप्र सरकार अब ‘पर्यटन केबिनेट ’ गठित करेगी खंडवा जिले के हनुवंतिया में नर्मदा क्वीन क्रूज में संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में खंडवा जिले के हनुवंतिया में देश की अपनी तरह की पहली मंत्रीपरिषद की बैठक में पर्यटन के विकास के लिये गहन विचार-विमर्श हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि कृषि केबिनेट की तर्ज पर प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को साकार रूप देने के लिये पर्यटन केबिनेट गठित की जायेगी। पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिये प्रदेश को एक साथ 6 राष्ट्रीय पुरस्कारों से पिछले महिनों नवाजा गया था, जिससे उत्साहित सरकार लगातार पर्यटन के क्षेत्र में तमाम प्रकार की संभावनाओं को तलाशने में लगी है। यही कारण पर्यटन के क्षेत्र में नये केंद्र के रूप में हनुमंतिया को उभारने के लिये केबिनेट की बैठक नर्मदा क्वीन क्रूज में रखी गई एवं यहां तमाम प्रकार के निर्णय भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये लिये गये, मसलन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये मंत्रिपरिषद ने पर्यटन विभाग को आवंटित शासकीय भूमियों का नीलामी से निवर्तन की नीति 2008 (यथा संशोधित-2014) में संशोधन करने का फैसला किया। ... 
देवदत्त दुबे -
कृषि केबिनेट के बाद मप्र सरकार अब ‘पर्यटन केबिनेट ’ गठित करेगी खंडवा जिले के हनुवंतिया में नर्मदा क्वीन क्रूज में संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में खंडवा जिले के हनुवंतिया में देश की अपनी तरह की पहली मंत्रीपरिषद की बैठक में पर्यटन के विकास के लिये गहन विचार-विमर्श हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि कृषि केबिनेट की तर्ज पर प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को साकार रूप देने के लिये पर्यटन केबिनेट गठित की जायेगी। पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिये प्रदेश को एक साथ 6 राष्ट्रीय पुरस्कारों से पिछले महिनों नवाजा गया था, जिससे उत्साहित सरकार लगातार पर्यटन के क्षेत्र में तमाम प्रकार की संभावनाओं को तलाशने में लगी है। यही कारण पर्यटन के क्षेत्र में नये केंद्र के रूप में हनुमंतिया को उभारने के लिये केबिनेट की बैठक नर्मदा क्वीन क्रूज में रखी गई एवं यहां तमाम प्रकार के निर्णय भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये लिये गये, मसलन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये मंत्रिपरिषद ने पर्यटन विभाग को आवंटित शासकीय भूमियों का नीलामी से निवर्तन की नीति 2008 (यथा संशोधित-2014) में संशोधन करने का फैसला किया। ..... 
देवदत्त दुबे -
भोपाल/ मैहर विधानसभा के उपचुनाव में प्रचार के दौरान राजनैतिक कार्यकर्ताओं को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि इस चुनाव में विकास, महंगाई एवं भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे, जातिगत ध्रुवीकरण के चलते पीछे छूट गये। एक ही जाति के दो-दो प्रत्याशी होने से जातियां अब सबके लिए जी का जंजाल बन गई है। मैहर विधानसभा के उपचुनाव को लेकर जहां एक बार फिर प्रदेश की निगाहें लगी हुई है। इसके पहले एेसी ही निगाहे झाबुआ लोकसभा के उपचुनाव और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर लगी थी यही कारण था कि इनके परिणाम आने के बाद प्रदेश में सियासी हवा बदलने की आहट महसूस की गई सो, भविष्य में यह हवा अपने-अपने पक्ष में बनाये रखने के लिए प्रदेश के दोनों ही दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जीत को आसान बनाने के लिए दोनों ही दलों ने जातीय आधार पर टिकट वितरण किया एवं सवा और बसपा के प्रत्याशी भी जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर उतरवाये गये इन सबका परिणाम अब यह है कि मैहर विधानसभा के उपचुनाव में न तो विकास, न भ्रष्टाचार, न महंगाई और न कानून व्यवस्था कोई प्रभावी मुद्दा बन पा रहा है।... 
देवदत्त दुबे -
‘सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर’
देखत में छोटे लगे, घाव करे गंभीर’’
बिहारी के दोहों के बारे में कही गई यह बात इस समय छोटे दलों पर एकदम फिट हो रही है, वैसे तो समय-समय प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय राजनीति में छोटे दल अपना महत्व यदाकदा प्रतिपादित करते रहे हैं लेकिन इस समय प्रदेश में इनका रुतबा मैहर विधानसभा के उपचुनाव में भरपूर देखने को मिल रहा है। भाजपा और कांग्रेस के लिये करो या मरो का प्रश्न बन चुका मैहर विधानसभा के उपचुनाव में दोनों दल एक-एक वोट को पाने के लिये सभी प्रकार के प्रयत्न कर रहे हैं। ऐसे में छोटे-छोटे दलों की तो मानो पौ-बारह हो रही है। नहीं तो क्या जरूरत थी कि बसपा दल को कि वो अपने उपचुनाव नहीं लड़ने के क्रम को ताक पर रखकर मैहर में ताल ऐसे ठोक रहा है जैसे जीत उसी के होने वाली है। इसी तरह समाजवादी पार्टी ने ऐसे ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा जैसे उस क्षेत्र में ब्राह्मण ही ब्राह्मण हो और भाजपा ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं दिया है। ये सब संकेत इन दलों के बढ़ते हुए रुतबे के प्रतीक है, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस की जीत हार का अंतर या परिणाम प्रभावित करने की क्षमता तो ये दल रखते ही हैं और कड़े मुकाबले की ओर भाजपा और कांग्रेस बढ़ रहे हैं, उससे इतना तय हो ही गया है कि जीत-हार का अंतर कम ही रहने वाला है।....
 
देवदत्त दुबे -
वे सब लोग अब मैहर की ओर रुख कर रहे हैं, जिनकी मुरादे सरकार अब तक पूरी नहीं कर पाई है, शायद सबको यही खबर है कि इस समय मैहर पहुंचने वालों की सभी मांगे पूरी हो रही है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ आज राजधानी भोपाल में प्रदर्शन करेगा और यदि तब भी मांगे नहीं मानी गई तो मैहर वाली मां शारदा के दरबार में अपनी मुराद पूरी करने की गुहार लगायेंगे। दरअसल, झाबुआ की हार से सबक लेकर सरकार त्रिस्तरीय पंचायती राज के प्रतिनिधियों को अब सरकार के साथ करने में जुटी है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री और त्रिस्तरीय पंचायती राज के प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चा में समन्वय बन चुका है, जिसमें सरकार ने अधिकांश मांगे मान ली है। 6 फरवरी को पंचायती राज के प्रतिनिधियों का एक विशाल सम्मेलन होने वाला है, जिसमें सभी मांगों को पूरी करने की घोषणा भी होगी। यहां बताते चले कि झाबुआ चुनाव भाजपा को हराने का श्रेय ये पंचायत प्रतिनिधि लेते रहे हैं, जिनकी पहले सरकार ने सुनी नहीं, लेकिन बाद में चर्चा भी की और मांगे भी पूरी की सो, इसका असर यह हुआ है। प्रदेश सरकार से अपनी मांगों को पूरी कराने के लिये लगातार संघर्ष कर रहे मध्यप्रदेश संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ आज राजधानी में शक्ति प्रदर्शन के बाद मैहर का रुख कर रहा है।... 
देवदत्त दुबे -
ज्यों-ज्यों चुनाव का कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है। त्यों-त्यों मैहर चुनाव का महत्व बढ़ता जा रहा है। अभी मतदान होने को लगभग एक पखवाड़ा है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस शह और मात का खेल चरम पर चल रहा है। भाजपा ने जहां बुधवार को क्षेत्र के दिग्गज कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल किया तो कांग्रेस ने गोडवाना गणतंत्र पार्टी और राष्ट्रीय समानता दल का समर्थन हासिल कर लिया। दरअसल मैहर विधानसभा का उपचुनाव ऐसे मोड़ पर हो रहा है जहां से प्रदेश के करवट बदलते राजनैतिक माहौल को नापा जायेगा। पिदले लगभग 12 वर्षों बाद भाजपा को उपचुनाव जीतने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दिल्ली बिहार में भाजपा की जो हवा बिगड़ी वह झाबुआ को झुलसा गई, जिसकी लपटों की आंच पिछले दिनों प्रदेश के विभिन्न अंचलों में हुए नगरीय निकाय के चुनावों में भी महसूस हुई ऐसे प्रतिकूल माहौल में भाजपा को मैहर चुनाव जीतने की कठिन चुनौति से सामना करना पड़ रहा है, जो मैहर सीट भाजपा केवल एक ही बार जीत पाई सो, भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। पहले क्षेत्र े व्यक्तिगत तौर पर सर्वाधिक जनाधार वाले नारायण त्रिपाठी को टिकिट दिया फिर पहली बार बसपा को उपचुनाव लड़ने के लिये मजबूर किया तिजससे कांग्रेस के वोट विभाजित हो सके। रही सही कसर बुधवार को पूरी कर दी जब भाजपा ने इलाके के दिग्गज कांग्रेस नेताओं विजयनारायण राय (पूर्व विधायक, पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस) और शशि मिश्रा (महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष) को समर्थकों सहित को भाजपा की सदस्यता मुख्यमंत्री की सभा में दिलाकर कांग्रेस को करारा झटका दे दिया। .... 
देवदत्त दुबे -
 पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश पुलिस में सुधारों की दिशा में गंभीरतापूर्वक कार्य हुआ है। पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ा है। तेजी से बदलते वातावरण में पुलिस के सामने चुनौतियां भी बदलती रहती है। इस कारण जब जैसी चुनौती आये उसके हिसाब से पुलिस दक्षता हासिल करनी होती है। इसके लिए मुखिया का सतर्क एवं सजग रहना जरूरी है। म.प्र. पुलिस के मुखिया सुरेन्द्र सिंह एेसे ही अफसर हैं जो हमेशा सतर्क एवं सजग रहते हैं। यहां तक कभी अपना मोबाइल भी बंद नहीं करते। इस संबंध में सिंह का मानना है कि पता नहीं, कब, किसे पुलिस सहायता की जरूरत पड़ जाये। सिंह पुलिस और जनता के बीच संवाद एवं संपर्क के पक्षधर हैं। वे इतने सहज एवं सरल भी हैं कि कोई भी दूर देहात से गरीब आदमी जब उनसे मिलने आता है तो सबसे पहले उसे वे सामने रखी कुर्सी पर बिठाते हैं और फिर न केवल समस्या सुनते हैं वरन तुरंत ही संबंधित पुलिस अधीक्षक को फोन लगाकर समस्या के निराकरण की बात करते हैं। मंडला, मुरैना, खंडवा, दुर्ग जैसे दूरस्थ जिलों में पुलिस अधीक्षक रहने के कारण उन्हें प्रदेश के कोने-कोने की जानकारी है। वे इस बात का दंभ भी नहीं भरते कि पुलिस व्यक्ति समाज को पूरी तरह सुधार सकती है। उनका मानना है कि व्यक्ति को माता-पिता, शिक्षक और समाज ही अच्छे संस्कार दे सकते हैं।
देवदत्त दुबे -
जब से पुलिस का गठन हुआ तब से यही कहा जाता है कि ‘जिस बस्ती का कोतवाल रात में जागत है उस बस्ती के लोग शांति से सोते हैं’ यह बात आज भी सटीक बैठती है इसके बावजूद भी पुलिस की इमेज ऐसी बना दी गई है कि पुलिस के नाम से शिकवा शिकायतों का दौर शुरू हो जाता है।  सोचो, यदि एक दिन के लिये ही सभी पुलिस थाने बंद कर दिये जाये और पुलिस घर बैठ जाये तो क्या किसी को नींद आएगी। सब अपने-अपने घर की छतों पर गश्त देते नजर आयेंगे। खासकर वे लोग जो साधन संपन्न है जिसके घर धन संपदा है, जिनकी पद प्रतिष्ठा है जबकि ये लोग पुलिस छवि ख्‍ाराब करने में सबसे आगे रहते हैं। पुलिस की छवि खराब करने में फिल्मों और मीडिया की भूमिका की भी चर्चा होती है। ऐसा भी नहीं कि पुलिस दूध की धुली हो। आखिर पुलिस में भी तो समाज से ही निकले लोग आते हैं जैसा कि एक मछली सारे तालाब गंदा कर देती है। ऐसा ही कुछ पुलिस वालों के कारण पूरे पुलिस विभाग को बदनाम किया जाता है, लेकिन जिस अनुपात में पुलिस का योगदान समाज को है, उस अनुपात में ये पुलिस की ये छोटी-मोटी बुराइयां कही नहीं टिकती, क्योंकि.... 
समय तो समय होता है वह एक दर्पण है जो न नया होता है और न ही पुराना पड़ता है, नये और पुराने हम पड़ते हमारा मन पड़ता है। सूर्य उत्तरायण होते ही शुभ कार्य शुरू हो जाते। यही समय शुभ संकल्प लेने का भी होता है जो जहां है वही से श्रेष्ठ कार्य शुरू कर सकता है। इसके लिये पद प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं पड़ती। मानव इतिहास इस बात का साक्षी है कि यदि आंतरिक तैयारी है तो क्रांति का बहाना एक छोटी घटना एक छोटा सा वाक्य यहां तक कि मात्र एक शब्द बन जाता है, लेकिन यदि तैयारी न हो तो बड़े-बड़े सारगर्भित उपदेश मोटे-मोटे ग्रंथों का ज्ञान बिलकुल उसी तरह बेअसर हो जाता है, जैसे नल के नीचे रखा उल्टा घड़ा हमेशा खाली रहता है। 
मैहर विधानसभा के उपचुनाव में लगभग यह तय माना जा रहा है कि प्रदेश के दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस दल-बदलुओं पर दांव लगाने जा रही है, जिसके कारण दोनों दलों के वरिष्ठ एवं समर्पित कार्यकर्ता नाराज भी बताये जा रहे हैं। दरअसल ये समस्या अकेले मैहर की नहीं है, ऐसी उलझन हर उस क्षेत्र में होगी, जहां जीतना प्राथमिकता में होगी। बहरहाल हम यहां बात चुनाव की की करेंगे। वर्तमान युग में मैनेजमेंट का युग है। सर्वे का युग है, जिसके आधार पर चुनाव से पहले ये आंकलन कर लिया जाता है कि किस व्यक्ति को प्रत्याशी बनाने पर जीत की संभावना ज्यादा रहेगी। मतलब किस व्यक्ति के पास पार्टी के अलावा अपना निजी वोट बैंक है। चाहे वह वोट बैंक उस व्यक्ति ने सेवा कार्य करके, जनहित के कार्य करके, पैसों के बल पर, जाति के बल पर, स्थानीयता के बल पर, सक्रियता के बल पर और चाहे फिर अपनी दबंगई के आधार पर ही क्यों न वोट बैंक बनाया हो। जब-जब दलों को जीत अनिवार्य होगी। ऐसे लोगों को टिकिट मिलेंगे। मैहर के पहले भी ऐसे अनेकों उदाहरण है, जब दलों ने अपने समर्पित, निष्ठावन कार्यकर्ताओं को किनारे करके दूसरे दल के दमदार व्यक्ति को अपना प्रत्याशी बनाया। मसलन बड़ा मलहरा के उपचुनाव में उमाभारती के खिलाफ भाजपा ने कम्युनिष्ट विचार धारा के कपूरचंद घुवारा को चुनाव लड़ाया था और साम, दाम, दंड, भेद का उपयोग कर ऐसे जीताया था, जेसे घुवारा जनसंघी हो और उमाभारती कम्युनिस्ट घुवारा को टिकिट उनके चुनावी इतिहास को देखकर ही दिया गया था। 
देवदत्त दुबे -
स्काउट गाइड एसोसिएशन के चुनाव को लेेकर प्रदेश के दोनों शिक्षा मंत्री आमने-सामने हैं। दोनाों ओर से कमिश्नर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के लिये नामांकन दाखिल कर दिये, हालांकि संगठन ने समाधान निकालने के लिये सभी से विड्राल फार्म भी भरा लिये हैं। पिछली बार की अपेक्षा इस स्काऊट गाइड एसोसिएशन के चुनाव और भी कठिन दौर में पहुंच गये हैं। पिछली बार चीफ कमिश्नर पद को लेकर जहां अशोक अर्गल और जितेंद्र सिंह के बीच खींचतान की बमुश्किल से तब अर्गल को संगठन समझाया पाया था, लेकिन इस बार के चुनाव में स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री आमने-सामने हैं। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी का कहना है कि अब तक के इतिहास में स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री ही स्काऊट गाइड एसोसिएशन का अध्यक्ष बनता रहा है। इस कारण इस परंपरा का पालन इस बार भी होना चाहिये, जोशी, पारस जैन को कमिश्नर बनाये जाने के पक्ष में नहीं है, जबकि पारस जैन ने चीफ कमिश्नर एवं अध्यक्ष के लिये नामांकन पत्र दाखिल किया है और उपाध्यक्ष पद के लिये अपने समर्थक प्रकाश चितौड़ा का नामांकन पत्र दाखिल कराया है। 
देवदत्त दुबे -
सत्ताधारी दल प्रायः पार्टी का अध्यक्ष कमजोर व्यक्ति को ही बनाता है, जिससे सत्ता के दो ध्रुव नहीं बन पाते जब-जब ताकतवर अध्यक्ष तब-तब सत्ता दो ध्रुवीय दिखने लगी और फिर उस अध्यक्ष को अंततः पुनः मौका नहीं दिया गया। भाजपा के पुनः प्रदेश अध्यक्ष बने नंदकुमार सहज, सरल है वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के निर्णयों में ही स्वीकृति देते आये हैं, उन्होंने न तो कभी भी जिद की और न ही किसी मुद्दे पर प्रतिष्ठा दावे पर लगाई जिससे उन्हें सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाकर चलने वाला अध्यक्ष माना जा रहा है, जबकि राजनैतिक समीक्षक उन्हें ‘रबर स्टेम्प’ ही मानते हैं। वैसे प्रदेश के इतिहास में जो भी मुख्यमंत्री रहा उसने अपनी पसंद का ऐसा अध्यक्ष बनवाया जो राजनैतिक रूप से कभी बड़ी ताकत न बन सके दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रीत्व काल में राधा किशन मालवीय ऐसे ही अध्यक्ष के जाने जाते रहे हैं। 
देवदत्त दुबे -
कोई व्यक्ति हो, संस्था हो या दल हो उसके सर्वेसर्वा की नियत कैसी है, उसी पर उसकी नियति निर्भर रहती है। खासकर नेतृत्व का निर्णय लेते वक्त यदि सकारात्मक सोच नहीं रखी गई तो फिर उसका परिणाम उस दल या संस्था को लंबे समय तक कीमत चुकाने के लिये मजबूर करता है। सोचो, पूरे देश में एक छत्र राज करने वाली कांग्रेस आज सिकुड़ी है, सिमटी है तो उसके पीछे कोई एक दो निर्णय कारण नहीं है बल्कि इतने वर्षों में जो भी नकारात्मक निर्णय हुए उससे धीरे-धीरे टुकड़ों-टुकड़ों में लोग नाराज होते गये और अंततः एक स्थिति ऐसी आ गई कि कांग्रेस संसद में विपक्ष का नेता होने की योग्यता खो दी, जब कांग्रेस देश में पूरे फार्म में थी तब कोई उसके निर्णय पर दल के अंदर या बाहर आक्षेप देता था तो पार्टी और सरकार उसे निपटाने में जुट जाती थी कहने का तात्पर्य यह है कि राजनैतिक दलों में जब-जब निर्णय योग्यता को किनारे कर लिये जायेंगे, मजबूत को कमजोर करने के प्रयास होंगे, अपना पट्ठा चुनने का मोह रहेगा तब-तब वहां देर सबेर कमजोरी आयेगी ही। 
देवदत्त दुबे -
नये वर्ष में कम से कम राजनैतिक दलों को यह संकल्प जरूर लेना चाहिये कि वे दल के अंदर मेहनतकशों को महत्व देंगे न जी हजूरी करने वालों, पैसा वालों, अपराधी किस्म के लोगों को, क्योंकि वर्तमान दौर राजनीति और राजनैतिक लोगों से ही सारी चीजें प्रभावित हो रही है, यदि इस क्षेत्र में मेहनतकश, ईमानदार, सामाजिक सरोकारों वाले नेताओं को महत्व मिलेगा तो समाज में न केवल राजनैतिज्ञों की साख बढ़ेगी वरन समूची व्यवस्था में सुधार होगा, नये वर्ष के शुरुआत में राजनैतिक दलों के इस प्रकार के संकल्प लेने का सुनहरा अवसर है। 
देवदत्त दुबे -
भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेशों के चुनाव जनवरी के पहले पखवाड़े में संपन्न कराना चाहता है। इस क्रम में मध्यप्रदेश प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव 4 और 5 जनवरी को संपन्न हो जायेगा। चुनाव तारीख नजदीक आते ही दावेदारों की धड़कने बढ़ गई एवं नववर्ष की शुभकामनाएं देने के बहाने बंद कमरों में रणनीतियां बना रहे हैं। अचानक से चुनाव तारीख नजदीक आ जाने के कारण कुछ दावेदारों ने नववर्ष में छुट्टियों पर जाने के कार्यक्रम भी निरस्त कर दिये हैं। बीत वर्ष 2015 के साथ ही यह जिज्ञासा भी समाप्त हो गई कि आखिर प्रदेश में भाजपा का नया प्रदेशाध्यक्ष कब चुना जायेगा, हालांकि प्रदेश संगठन जिस तरह से विवादों के बीच जिलों के चुनाव निपटा रहा था, उससे यह संभावना बन रही थी कि जनवरी के पहले पखवाड़े में भाजपा को नपा प्रदेशाध्यक्ष मिल जायेगा। 
देवदत्त दुबे -
कभी अनुशासन का दंभ भरने वाली भाजपा को आज दिल्ली से लेकर मंडल तक अपनों की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। संगठन चुनाव में बढ़ते विवादों के चलते पार्टी ने जहां सवा सौ मंडलों के चुनाव स्थगित कर दिये हैं, वहीं बड़े जिलों के जिला अध्यक्ष अब कोर कमेटी तय करेगी। लगता है राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी करने का असर अब नीचे तक आ पहुंचा है। शायद यही कारण है कि पार्टी के छुटभैया नेता भी अब दिग्गज नेताओं की बात नहीं मान रहे हैं। प्रदेश जब से संगठन के चुनाव हुए तभी से पार्टी का पूरा जोर था कि कही भी चुनाव नौबत न आये आम सहमति से सभी चुनाव संपन्न हो जाये लेकिन हालत यह है कि प्रदेश पार्टी को लगभग सवा सौ मंडलों के चुनाव स्‍थगित करना पड़ा है, क्योंकि इन मंडलों में सांसद, विधायक और संगठन नेताओं के बीच किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। सबसे ज्यादा विवाद तो राजधानी भोपाल में ही है, जहां पार्टी के कर्ताधर्ता रहते हैं। सो, आम सहमति के सभी प्रयास असफल होने के बाद पार्टी ने तय किया है कि इन सवा सौ मंडलों मंे मंडल अध्यक्ष का मनोयन जिला अध्यक्ष और प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव के बाद किया जाएगा। क्योंकि प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव के लिये प्रदेश में साठ फीसदी मंडलों के चुनाव होना जरूरी है जो हो चुके हैं। 
प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस इस समय बगावत से परेशान भाजपा में मंडल अध्यक्षों को लेकर नेताओं के माथे पर बल है तो कांग्रेस में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर अपनों की बगावत से खासी परेशान है। भाजपा में इस बार प्रदेशाध्यक्ष चुनना कितना कठिन होगा। इसका अंदाजा मंडल अध्यक्ष को चुनने में पार्टी को आ रही मुश्किलों से अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा के प्रदेश में लगभग 761 मंडल है, जिनमें से करीब 534 में चुनाव हुए हैं, लेकिन हालत यह है कि दो-चार जिलों को को छोड़ दे तो अधिकांश जिलों में कही एक तो कही तीन मंडल अध्यक्षों पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। राजधानी भोपाल में ही मंडल अध्यक्ष को लेकर विधायकों और संगठन के बीच जमकर तनातनी चल रही है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में मंडल अध्यक्ष चुनने को लेकर बवाल मचा हुआ है। प्रदेश कार्यालय और पार्टी के दिग्गज नेताओं को पास लगातार शिकायतें बढ़ रही है। कुछ जिलों से तो प्रतिनिधि मंडल भोपाल आकर नेताओं से मिल चुके हैं। प्रदेश में चौतरफा बढ़ रहे हैं। 
देवदत्त दुबे -
आगामी 22 दिसंबर को प्रदेश में होने जा रहे तीन नगर पालिका और पांच नगर परिषद के चुनाव के लिये भाजपा और कांग्रेस माहौल बनाने के लिए जमकर मशक्त कर रहे हैं। झाबुआ चुनाव के बाद वहां कांग्रेस उत्साहित है, वहीं भाजपा एक बार फिर मनेजमेंट पर जोर दे रही है। वैसे तो दोनों दलों की ओर से बागी प्रत्याशी मैदान में नाम वापिसी की तिथि निकल जाने के बाद डटे हैं, लेकिन प्रदेश नेतृत्वअब बागियों को मैदान से हटने के लिये मना रहा है। भाजपा की ओर से प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान औरसंगठन महामंत्री अरविंद मेनन ने इन चुनावों को लेकर लंबी चर्चा की एवं संगठन मंत्रियों, जिला अध्यक्षों स्थानीय विधायकों और क्षेत्रीय मंत्रियों को इन चुनावों की जिम्मेदारी सौंपने पर विचार हुआ और जहां-जहां प्रतयाशी को लेकर विरोध है। वहां कार्यकर्ताओं की बैठकें लेकर विरोध को शांत करने की रणनीति पर भी विचार हुआ।  
बड़वानी के आंख आपरेशन कांड पर आज विपक्ष द्वारा लाये गये स्थगन पर पक्ष-विपक्ष के सदस्यों ने चर्चा के दौरान एक-दूसरे ने केवल कटाक्ष किये वरन इतने गंभीर मुद्दे पर भी हास-परिहास की स्थिति देखने को मिली। स्थगन प्रस्ताव पर विपक्ष की ओर चर्चा रामनिवास राव ने शुरू की फिर बाला बच्चन ने सत्ता पक्ष पर जमकर आरोप लगाये, इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ़ गोविंद सिंह बोलने खड़े हुए और कहने लगे-.... 
देवदत्त दुबे -
मप्र विधानसभा के मानसरोवर हाल में चले दो दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर विधायकों के सहायकों को समझाया गया कि जिस तरह सुहागिन स्त्री के माथे पर हमेशा सिन्दूर होता है वैसे ही सहायकों को हमेशा विधायकों के साथ होना चाहिये। मतलब सातों दिन चौबीसों घंटे और तीन सौ पैंसठ दिन हमेशा साथ रहे। देश में पहली बार विधायकों के सहायकों को प्रशिक्षण देने की शुरूआत मध्यप्रदेश से हुई है। दरअसल पिछले वर्षों मप्र में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिसमें सहायकों के कारण विधायक या मंत्री को बदनामी झेलनी पड़ी है। पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा यदि इस समय जेल में है तो इसके पीछे उनके ओएसडी शुक्ला को कारण बताया जा रहा है जो स्वयं भी जेल में है। इसी प्रकार पूर्व मंत्री जगदीश देवड़ा के पीए के कारण बदनामी झेलनी पड़ी थी। इसके अलावा भी यदि चतुर या कहे जानकार पीए न हो तो विधायकों और मंत्रियों को पल-पल में तनाव होता है, लेकिन जिस प्रतिनिधि के पीए समझदार होते हैं।... 
जब तक सफलता मिलती रहती है तब तक गलतियों पर ध्यान नहीं जाता लेकिन जैसे ही असफलता मिलती है खामियों को खोजने का काम शुरू हो जाता है कुछ एेसा ही इस समय मध्यप्रदेश में हो रहा है। झाबुआ लोकसभा उपचुनाव में मिली करारी हार और देवास विधानसभा से वोट प्रतिशत कम हो ाने पर तमाम प्रकार के मंथन के बाद यही निष्कर्ष निकला है कि म.प्र. में मतदाताओं का पार्टी से धीरे-धीरे मोह भंग हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण प्रदेश में कुछ चुनिंदा आई.ए.एस. अफसरों का राज होना माना जा रहा है। जिसके चलते प्रदेश सरकार के अधिकांश मंत्री अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। समय-समय पर मंत्री अपने कष्ट को मुख्यमंत्री के सामने भी रख चुके हैं लेकिन आई.ए.एस. लाबी के कुछ चुनिंदा अफसर इसे मंत्रियों की असफलता में बदल देते हैं और तरह-तरह की खामियां मंत्रियों की खोजी जाने लगती है। नौबत यहां तक आ चुकी है कि कुछ अवसरों पर अफसर और मंत्री के बीच या तो तू-तू, मैं-मैं की स्थिति बन जाती है या फिर आपस में संवाद ही नहीं होता। जैसा कि पिछले दिनों जब सूखे की समस्या पर बैठक चल रही थी तब जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया और राजस्व मंत्री रामपाल सिंह के बीच नोंक-झोंक हुई थी जिसमें मंत्री का आशय यही था कि एयर कंडीशनर आफिसों में बैठने वालों को जमीनी हकीकत पता नहीं होती है।... 
भले ही मैहर विधानसभा का उपचुनाव घोषित नहीं हुआ हो लेकिन यहां दोनों दलों की ओर से दांव-पेंच शुरू हो गये हैं। इस मामले में भाजपा के छुटभैया नेता कुछ ज्यादा ही तेज चल रहे हैं। वे एक ओर नारायण त्रिपाठी को टिकिट दिये जाने का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेसी नेताओं के साथ कदम ताल कर रहे हैं। मैहर विधानसभा के उपचुनाव को लेकर भाजपा की मुश्किलें भाजपा के स्थानीय नेता अभी से बढ़ा रहे हैं। वे नारायण त्रिपाठी की टिकिट न मिले इसके लिये न केवल लामबंद हो रहे हैं वरन अभी से भाजपा को हराने के लिये कांग्रेस नेताओं से नददीकियां बढ़ा रहे हैं। दरअसल इस क्षेत्र के नेताओं को इस बात का भय है कि यदि नारायण त्रिपाठी चुनाव जीत गये तो उनके भविष्य की संभावनाएं धूमिल हो सकती है। चाहे सांसद गणेश सिंह हो या फिर विधायक संजय पाठक अंदरुनी तौर पर नारायण त्रिपाठी को टिकिट दिये जाने के विरोध में बताये जा रहे हैं। सीधे तौर पर ये लोग सामने न आकर अपने समर्थकों से विरोध करवा रहे हैं बताते हैं कि गणेश सिंह को आशंका है कि नारायण त्रिपाठी यदि जीत गये तो भविष्य में लोकसभा टिकिट के महत्वपूर्ण दावेदार होंगे तो संजय पाठक को अशंका है कि यदि त्रिपाठी जीत गये तो उनकी जगह वे मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। 
कनाडा में एक तरफ जहां भारत, अमेरिका समेत 20 देशों के प्रतिनिधि कोरिया संकट के समाधान के लिए माथापच्ची कर रहे हैं, वहीं नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर शांति की कोशिशों को झटका देने की कोशिश की है। मंगलवार को नॉर्थ कोरिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उस ट्वीट संदेश पर आपत्तिजनक टिप्पणी की......
नई दिल्लीः इन दिनों भारतीय जनता पार्टी पर साउथ के मशहूर अभिनेता प्रकाश राज के शीत युद्ध जारी है। इसी का ताजा उदाहरण कर्नाटक में भी देखने को मिला। एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे अभिनेता के जाने के बाद भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गौमूत्र से मंच को धोया।
बेंगलुरुः कर्नाटक में चुनावी रंग परवान चढ़ने लगा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। योगी आदित्यनाथ की खिंचाई के बाद सीएम सिद्धारमैया ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोला है। सिद्धारमैया ने कांग्रेस को पांडवों की तरह और भाजपा को कौरव बताया है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एक घर में अपने ही 13 बच्चों को बंधक बनाकर रखने वाले एक दंपति को गिरफ्तार किया गया है. 57 वर्षीय डेविड एलेन तुरपिन और 49 वर्षीय लुइस अन्ना तुरपिन के सभी 13 बच्चे कुपोषित हालत में मिले. उनकी आयु दो से लेकर 29 वर्ष तक है. पुलिस के मुताबिक, बच्चों को जब मुक्त कराया गया, उस समय कुछ बच्चे अंधेरे में पलंग से बंधे थे.
जालंधरः जापान की वाहन निर्माता कम्पनी Isuzu ने भारत में अपनी Isuzu D-Max  की V-Cross कार को लांच कर दिया है। कीमत की बात करें तो इसकी High ट्रिम की एक्स-शोरूम कीमत 15.76 लाख रुपए और Standard ट्रिम की एक्स-शोरूम कीमत 14.26 लाख रुपए रखी गई है। वहीं, इस कार को एक नए कलर ऑप्शन रूबी रेड में लांच किया गया है।
मुंबईः कमला मिल हादसे में पुलिस ने एक और गिरफ्तारी हुई है। मोजोस बिस्ट्रो पब के मालिक युग तुली ने मंगलवार को मुंबई पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पिछले 29 दिसंबर को हुई इस घटना में 14 लोग मारे गए थे। आत्मसमर्पण करने के बाद तुली को गिरफ्तार कर लिया गया।
14-01-2018
भोपाल। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने खाद्य महकमे के 143 कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों की भर्ती में पेंच लगा दिया है। विभाग अभी तक इन पदों पर डिप्लोमाधारकों को भी आवेदन करने का मौका देता आया है। लेकिन इस बार प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड ने विभाग के प्रस्ताव को यह कहते हुए लौटा दिया कि इस पद के लिए डिग्री अनिवार्य है इसलिए डिप्लोमाधारकों को इसके लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे।
16-01-2018
भोपाल : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अपने सुरक्षाकर्मी को कथित रूप से थप्पड़ मार कर धक्का देने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना रविवार की है। शिवराज नगर पालिका चुनाव में प्रचार के लिए सरदारपुरा गए हुए थे। उन्होंने वहां रोड शो भी किया था।
दिनेश निगम ‘त्यागी’
-सच क्या है यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ही जाने, पर गुजरात में भाजपा की नई सरकार के शपथ ग्रहण शुरू होने से पहले ही वापस लौटने की वजह से शिवराज सिंह को लेकर शुरू हुआ अटकलों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे शिवराज से भाजपा नेतृत्व की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि उनकी कुर्सी खतरे में है। ऐसी ही अटकलें अमित शाह के उज्जैन दौरे के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान को लेकर चल पड़ी हैं। हालांकि इनका कोई ठोस आधार नहीं है। मुख्यमंत्री तो गुजरात से वापस लौटने के बाद मीडिया के सवाल के जवाब में और ट्वीट के जरिए स्पष्टीकरण देते हुए कह चुके हैं कि उनका पहले से कार्यक्रम निर्धारित था इसलिए वे मुख्यमंत्री....
16-01-2018
बोगोटा। सेंट्रल कोलंबिया में एक निर्माणाधीन ब्रिज गिरने की वजह से दस लोगों की मौत हो गई। वहीं इस हादसे में कई मजदूर अभी भी लापता हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस घटना में 2 लोग लापता हैं, जबकि 4 घायल हो गए हैं। चिराजारा में बन रहा ये ब्रिज, मेटा प्रांत में आता है और ये उस हाईवे का हिस्सा है, जो राजधानी बोगोटा को विलाविसेनसियो से जोड़ता है और अभी इसे आवाजाही के लिए नहीं खोला गया है।
16-01-2018
ganpat vasava 16 01 2018अहमदाबाद। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गणपतसिंह वसावा की कार पर हमला करने का मामला सामने आया है। एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे मंत्री की कार पर कुछ अनजान लोगों ने पथराव कर दिया, जिसके कारण मंत्री जी को कार्यक्रम से मजबूरन वापस लौटना पड़ा। यह घटना रविवार की है।
16-01-2018
मुंबई। चोट की वजह से नियमित विकेटकीपर रिद्धिमान साहा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले तीसरे टेस्ट से बाहर हो गए। उनकी जगह दिनेश कार्तिक को भारतीय टीम में शामिल किया गया है और वे 24 जनवरी से होने वाले तीसरे टेस्ट से पहले भारतीय टीम के साथ जुड़ेंगे। साहा हैमस्ट्रिंग की चोट से जूझ रहे हैं और इसी के चलते वे अंतिम समय में दूसरे टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर हुए थे।
16-01-2018
patanjali 16 01 2018नई दिल्ली। पहले ही एफएमसीजी सेक्टर में काफी उथल-पुथल मचा चुकी पतंजलि आयुर्वेद अब ई-कॉमर्स के जरिये धमाका करने जा रही है। पतंजलि आयुर्वेद ने मंगलवार को एक साथ ई-कॉमर्स क्षेत्र की आठ बड़ी कंपनियों के जरिये अपने उत्पादों की बिक्री शुरू करने का एलान किया है। इसका मतलब हुआ कि.....
कैबिनेट: सातवें वेतनमान पर बैठक में नहीं हुई चर्चा, मेधावी छात्रों की फीस देगी सरकारभोपाल। सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई। हालांकि, सातवें वेतनमान का मुद्दा स्थगित कर दिया गया। कयास लगाई जा रही थी कि प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारियों को 1 जुलाई 2017 से ...
भोपाल/ प्रदेश के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को विधानसभा में घोषणा की कि लोगों के करोड़ों रुपए ठग कर भागने वाली कंपनियों की मानीटरिंग एवं समय पर कार्रवाई करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय में एडीजी के नेतृत्व में एक मानीटरिंग सेल का गठन किया जाएगा। इसके साथ रिजर्व बैंक आफ इंडिया को पत्र लिखकर आग्रह किया जाएगा कि वे कंपनियों को लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस का सत्यापन अनिवार्य करें। गृह मंत्री विधानसभा में भाजपा के यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण एवं सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं का जवाब दे रहे थे।


बाहुबली 2बाहुबली जब से रिलीज हुई है तब से फिल्मी दुनिया पर छाई हुई है. भारत में सफलता पाने वाली बाहुबली 2 विदेश को विदेशों में भी काफी सराहा जा रहा है. खबर है कि बाहुबली 2 मोस्को के अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में ओपनिंग फिल्म के तौर पर दिखाई जाएगी.
सर्दियों मेें धूप हर किसी को ही अच्छी लगती है लेकिन आजकल लोग या तो टैनिंग की वजह से या फिर अपने काम काज के कारण धूप नहीं ले पाते लेकिन यदि आप इसके फायदों के बारे में जानेगें तो आपको पता चलेगा कि धूप लेने से कितनी ही बीमारियां ठीक होती है।
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25 सितंबर
उपांग ललिता पंचमी व्रत। ललिता पंचमी। सोमवती पंचमी पर्व। बुध अस्त पूर्व में 16/22 पर।
26 सितंबर
बुध कन्या राशि में 10/28 पर। शुक्र पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में 26/20 पर।
27 सितंबर
मूल नक्षत्र में सरस्वती देवी का आवाह्न। भद्रकाली अवतार। अन्नपूर्णा परिक्रमा प्रारम्भ 19/09 बजे से। ओली प्रारम्भ (जैन) चतुर्थी पक्ष। सूर्य हस्त नक्षत्र में 05/56 पर। सूर्य-सूर्य, स्त्री-नपुंसक योग, वाहन मूषक, वायु नाड़ी, तदीश सूर्य (पुरुष), अत: बहुत हवा चले अनावृष्टि हो।
28 सितंबर
दुर्गाष्टमी व्रत। महाष्टमी। अष्टमी का हवनादि आज ही करें। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सरस्वती देवी का पूजन। अन्नपूर्णा परिक्रमा समाप्त 21/37 बजे। ओली प्रारम्भ (जैन पंचमी पक्ष)। श्री अष्टभुजी दुर्गा शक्ति पीठ (दुर्गा मंदिर) कानपुर में शतचण्डी यज्ञ का हवन पूर्णाहुति एवं महाप्रसाद वितरण। शक्ति संगीत सभा।
29 सितंबर......


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